Tejashwi Yadav ने शराब कांड पर Nitish Kumar से पूछे 15 सवाल, क्या जवाब दे पाएंगे मुख्यमंत्री ?

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Tejashwi Yadav & Nitish Kumar

Tejashwi Yadav ने बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar से शराब कांड पर 15 ज्वलंत सवाल पूछे हैं। सोशल मीडिया फेसबुक के माध्यम से राजद नेता तेजस्वी यादव ने इस दुखद घटना की सारी जिम्मेदारी भाजपा-जदयू गठबंधन के मुखिया नीतीश कुमार पर डालते हुए जबरदस्त हमला बोला है।

बिहार में बीते दिनों जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या 33 हो गई है। इनमें पश्चिम चंपारण के 16, गोपालगंज के 13 तथा समस्तीपुर के चार लोग शामिल हैं। साल 2021 की बात करें तो अब तक जहरीली शराब करीब 85 से अधिक लोगों की जान ले चुकी है।

बिहार में शराबबंदी पूरी तरह से फेल

विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने घटना के बाद मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की शराबबंदी को पूरी तरह से फेल बताते हुए सवाल किया था कि क्या शराबबंदी का ढोल पीटने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसके जिम्मेदारी नहीं हैं?

इसके साथ ही राजद नेता तेजस्वी यादव ने इस घटना के लिए शराबबंदी के बाद इसे रोकने के लिए लागू किये गये कानूनों और उस पर हावी अफसरशाही के साथ-साथ शराब माफियाओं और नेताओं पर मिलभगत का आरोप लगाते हुए जोरदार प्रहार किया है।

वहीं एनडीए में नीतीश कुमार के साथी और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम माझी ने भी शराबबंदी पर सवाल उठाते हुए कहा था कि बिहार में 50 हजार करोड़ की शराब की खपत होती है, बड़े माफिया, पुलिस-पदाधिकारी शराबबंदी के बाद माला-माल हो रहे हैं और गरीब जनता पिस रही है।

मालूम हो कि बिहार में शराबबंदी कानून लागू हुए 6 साल बीत चुके हैं लेकिन हर साल शराब से होनी वाली मौतों ने इस शराबबंदी पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

तेजस्वी यादव का शराब कांड को लेकर नीतीश कुमार से 15 सवाल

तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार को लिखे इस खुले पत्र में लिखा है कि चंद चुनिंदा अधिकारियों के चश्मे से बिहार के हर हालात और घटना को देखने वाले माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार क्या मेरे इन ज्वलंत सवालों के जवाब दे पाएँगे?

1. बिहार में आए दिन शराब की कथित बड़ी बड़ी ख़ेप पकड़ाती है, जब्त किए गए शराब और गाड़ी की पुनः तस्करों के हवाले करने के लिए थानों से ही बोली लगती है जिसका बड़ा हिस्सा प्रशासन व पुलिस के अफसरों और सत्तारूढ़ नेताओं के जेबें गरम करती हैं, क्या मुख्यमंत्री को इस बात की जानकारी नहीं है? बिल्कुल है!

2. बिहार में दूसरे राज्यों से शराब आता है तो बिहार सीमा के अलावा औसतन 4-5 जिलों से होते हुए अपने गंतव्य स्थल तक पहुँचता है। बिना विभिन्न जिलों के प्रशासन, मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग व पुलिस के शीर्ष अफसरों की आपसी मिलीभगत, तालमेल और तय हिस्सेदारी के क्या इसका पहुँचना संभव है?

3. क्या मुख्यमंत्री नहीं जानते कि बिहार में शराब सिर्फ़ और सिर्फ़ बोतल में बंद है लेकिन चारों तरफ़ थानों और प्रशासन की निगरानी में हर चौक-चौराहे से शराब की खुलेआम धड़-धड़ल्ले से बिक्री होती है?

4. क्या श्री नीतीश कुमार नहीं जानते कि शराब तस्करों को दी जा रही छूट के बदले मिलने वाली राशि के बल पर ही उनकी पार्टी बिहार की सबसे धनी पार्टी बन गई है?

5. क्या यह संभव है कि नीतीश कुमार नहीं जानते कि शराबबंदी कानून के लचर कार्यान्वयन के कारण राज्य में 20 हज़ार करोड़ की एक समानांतर अवैध अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है जिसके सबसे बड़े लाभार्थी जदयु भाजपा में बैठे शराब माफिया के लोग, सरकारी अफसर और पुलिस प्रशासन के लोग हैं?

6. बिहार में आज तक शराबबंदी पुख्ता तरीके से लागू नहीं हो पा रहा है क्योंकि इसे लागू करने वाले व्यक्ति के मन में ही खोट है। नीतीश कुमार ने बड़ी कुटिलता से शराबबंदी से होने वाले अवैध आय को अपनी पार्टी की रीढ़ की हड्डी बना लिया है!

7. आज तक शराब माफिया से मिलीभगत पर किसी वरिष्ठ अफसर या सत्तारूढ़ नेता पर कार्रवाई नहीं हुई है। जबकि भाजपा जदयु के नेताओं के विरुद्ध लगातार सबूत मिलते रहे हैं, ये नेता पकड़ाए भी जा रहे है इनके वीडियो भी सामने आते रहे है।

8. आज तक शराबबंदी कानून में कोई पैसेवाला या रसूखदार जेल नहीं गया है। सभी पैसे देकर छूट जाते हैं पर 3 लाख से अधिक गरीब-दलित वर्गों के लोग, जो पुलिस व प्रशासन की लोभी जेबों को गरम करने के योग्य नहीं थे, का जीवन खराब कर दिया गया।

9. जो लोग शराबबंदी कानून में जेलों में बंद हैं, लगभग वो सभी दलित, अतिपिछड़े व गरीब पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके जेल में रहने से उनके परिवार आर्थिक, शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से प्रभावित हुए हैं।

10. मुख्यमंत्री प्रवचन देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। कानून व्यवस्था उनके ही जिम्मे है। पुलिस प्रशासन उन्हीं के अधीन है। शराबबंदी की नाकामी नीतीश कुमार की नाकामी है। और हर जहरीली शराब कांड में जाने वाली जानों के जिम्मेदार नीतीश कुमार खुद हैं।

11. क्या शराबबंदी से उत्पन्न संस्थागत भ्रष्टाचार और संस्थागत हत्याओं के ज़िम्मेवार केवल और केवल माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार नहीं है?

12. मुख्यमंत्री बतायें, शराबबंदी के नाम पर अपने प्रिय नज़दीकी अधिकारियों संग हुई हज़ारों समीक्षा बैठकों में चाय-बिस्कुट और पकौड़ों की खपत के अलावा धरातल पर इन बैठकों का कोई सकारात्मक परिणाम सामने आया?

13. क्या मुख्यमंत्री नहीं जानते कि उनके अधीन पुलिस उन्हीं की आँखों में धूल झोंकती है? 50 ट्रक शराब की तस्करी कराने के बाद पुलिस एक पुराना ट्रक ज़ब्त दिखाती है जिसमें दिखावे के लिए सीमित मात्रा में शराब और बाक़ी पेटियों और बोतलों में बनावटी रंग भरा होता है। क्या बिहार की इंटेलिजेन्स, पुलिस और गृह विभाग इस सच्चाई से अवगत नहीं है?

14. नवादा, मुज़फ़्फ़रपुर, समस्तीपुर, गोपालगंज, बेतिया, बक्सर इत्यादि ज़िलों में ज़हरीली शराब से हुई सैंकड़ों मौतों का ज़िम्मेवार कौन है?

15. लगभग 6 वर्ष बाद भी शराबबंदी क़ानून सही से लागू नहीं हो पाया एवं उसका अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आया तो उसका ज़िम्मेवार कौन है? क्या यह विशुद्ध रूप से गृहमंत्री सह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अदूरदर्शिता, असफलता और कमजोर नेतृत्व क्षमता का परिचायक नहीं है?

बिहार में शराबबंदी के बावजूद जिस तरह से शराब पीने से लोगों की मौतें हो रही हैं, उसे देखते हुए इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि बिहार की लालफीताशाही ने कहीं न कहीं नीतीश कुमार के इस महात्वाकांक्षी पहल को पलीता लगा दिया है। अब आने वाले समय में नीतीश कुमार कैसे शराबबंदी पर नकेल कसते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। लेकिन तब तक नीतीश कुमार को विपक्ष के हमले सहने ही होंगे। इससे बचने का उनके पास कोई उपाय नहीं है।

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