उद्धव बनाम शिंदे: इस्तीफा देना उद्धव की गलती; बच सकती थी सरकार, पढ़ें सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की बड़ी बातें…

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Maharashtra Sena VS Sena
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Maharashtra Sena VS Sena: सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के सीएम शिंदे की सेना के 16 विधायकों की अयोग्यता के मुद्दे पर गुरुवार को सुनवाई की। व्हिप जारी किए जाने के बावजूद तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की बैठक में शामिल नहीं होने के कारण शिंदे सहित 16 विधायकों को अयोग्यता नोटिस भेजा गया था। जुलाई में, जब शिंदे ने राज्य विधानसभा के पटल पर विश्वास मत मांगा, तो सत्तारूढ़ भाजपा-शिवसेना गठबंधन को कुल 288 विधायकों में से 164 का समर्थन मिला और वह मुख्यमंत्री बने। इन्हीं 16 विधायकों की अयोग्यता को लेकर उद्धव गुट ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया था। यहां पढ़ें सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अहम बातें:

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Maharashtra Sena VS Sena: सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बातें…

  • CJI ने कहा कि स्पीकर को शिवसेना के प्रमुख को पार्टी की संविधान के हिसाब से चुनना चाहिए था।
  • CJI ने कहा गवर्नर ने ठाकरे को बहुमत परीक्षण के किये बुलाना गलत था। गवर्नर के पास सबूत नहीं थे।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट का सामना नहीं किया। ऐसे में उनको बहाल नहीं कर सकते।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा पुरानी स्थिति बहाल नहीं कर सकते।
  • CJI ने कहा कि उद्धव ठाकरे के फ्लोर टेस्ट का सामना नहीं किया बल्कि उन्होंने इस्तीफा दिया था। ऐसे में कोर्ट इस्तीफे को रद्द तो नहीं कर सकता है। वहीं अगर उद्धव इस्तीफा नहीं देते तो हम राहत दे सकते थे।
  • 2016 का फैसला सही नहीं था। इसमें कहा गया था कि डिप्टी स्पीकर या स्पीकर के खिलाफ अयोग्यता का मामला है तो उसे कोई फैसला लेने का अधिकार नहीं होगा।
  • स्पीकर ने कोशिश नहीं की कि शिवसेना की ओर से शिंदे गुट के गोडावले आधिकारिक व्हिप हैं या फिर उद्धव गुट के प्रभु। स्पीकर को यह जरूर पता होना चाहिए कि राजनीतिक पार्टी ने किसे व्हिप चुना है।
  • स्पीकर ने शिंदे गुट वाले गोडावले को व्हिप नियुक्त किया, यह फैसला गैरकानूनी था। नवंबर 2019 में विधायकों ने एकमत होकर उद्धव ठाकरे को पार्टी का लीडर चुना था।
  • महाराष्ट्र में शिंदे और उनके गुट के 16 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के फैसले पर बड़ी बेंच को विचार करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर विधायक सरकार से बाहर होना चाहते हैं तो वो केवल एक गुट बना सकते हैं। पार्टी के भीतरी झगड़े सुलझाने के लिए फ्लोर टेस्ट का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
  • स्पीकर को केवल राजनीतिक दल द्वारा नियुक्त व्हिप को ही मान्यता देनी चाहिए।
  • स्पीकर को गोगावले को व्हिप की मान्यता नहीं देनी चाहिए थी।
  • CJI ने कहा गवर्नर की भूमिका के बारे में भी हमनें विस्तार से आदेश में लिखा है। क्योंकि याचिकाकर्ता ने गवर्नर की भूमिका पर सवाल उठाया है?
  • स्पीकर के समक्ष अयोग्यता की कार्यवाही को ECI के समक्ष कार्यवाही के साथ नहीं रोका जा सकता, यदि अयोग्यता का निर्णय ECI के निर्णय के लंबित होने पर किया जाता है और ECI का निर्णय पूर्वव्यापी होगा और यह कानून के विपरीत होगा।

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