साल 2019 में होने वाले कुम्भ मेले की तैयारियों को लेकर संगम नगरी में चौराहों को सुंदर बनाने और सड़कों को चमकाने का काम चल रहा है। इसी कड़ी में बालसन चौराहे के चौड़ीकरण की जद में देश के पहले पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरु की प्रतिमा आ गई। नतीजा शहर को चमकाने के लिये पंडित नेहरु की प्रतिमा शिफ्टकर दी गई। ऐसे में कांग्रेस कैसे नहीं उबलती। उसने इसे नेहरु की प्रतिमा के खिलाफ योगी सरकार की साजिश करार दिया। कांग्रेस का तर्क है कि बालसन चौराहे पर लगी पंडित दीन दयाल उपाध्याय की प्रतिमा के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई। लेकिन पंडित नेहरु की प्रतिमा शिफ्ट कर दी गई। विपक्षी एकता के बहाने सपा भी कांग्रेस नेताओं के साथ कदमताल करती दिखी।

मूर्ति हटाए जाने से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया और इसको योगी सरकार की साजिश करार दिया। जबकि जिला प्रशासन ने साफ किया है कि कुंभ मेले के लिए निर्माण कार्य के चलते मूर्ति हटाई गई है। एडीए ने नेहरु की प्रतिमा को मूल स्थान से तीस मीटर दूरी पर स्थापित भी कर दिया है।

कांग्रेस के आरोप योगी सरकार पर हैं जबकि इलाहाबाद विकास प्राधिकरण ने इसकी वजह कुंभ के सौंदर्यीकरण कार्यों को बताया है जिसमें करोड़ों लोग आएंगे। बीजेपी ने भी कांग्रेस और सपा के आरोपों को सिरे से नकार दिया है। बीजेपी का तो यहां तक कहना है कि जरुरत पड़ी तो दीन दयाल उपाध्याय की मूर्ति वाले चौराहे को भी छोटा किया जा सकता है। बीजेपी ने मूर्ति शिफ्टिंग की सियासत पर कांग्रेस पर पलटवार करते हुए प्रतीकात्मक राजनीति करने के आरोप लगाए हैं।

खबर है कि देश के पहले प्रधानमंत्री की मूर्ति आनंद भवन क्षेत्र में फिर से लगाई जाएगी, जो ओल्ड इलाहाबाद को न्यू इलाहाबाद से जोड़ता है। खैर मूर्ति को शिफ्ट हो चुकी है लेकिन सियासी सोच पक्ष-विपक्ष में शिफ्ट होने की बजाय देशहित में कब शिफ्ट होगी। इसकी महज कल्पना ही की जा सकती है।

एपीएन ब्यूरो

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