राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने गुरुवार को श्री श्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लीविंग द्वारा 2016 में आयोजित वर्ल्ड कल्चरल फेस्टिवल के दौरान यमुना को हुए नुकसान पर अपना फैसला सुनाया। यमुना को नुकसान पहुंचाने के मामले में एनजीटी ने श्रीश्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग और दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) को दोषी माना है। हालांकि NGT ने आर्ट ऑफ लीविंग पर कोई अतिरिक्त जुर्माना नहीं लगाया है।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) के अध्यक्ष जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी यमुना खादर को हुए नुकसान को ठीक करने का काम करे। डीडीए ने अपनी ज़िम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई है और उसे नुकसान का ठीक से आंकलन करना चाहिए। एनजीटी ने कहा कि जो 5 करोड़ रुपये ऑर्ट ऑफ लिविंग पर पहले ही जुर्माने के तौर पर लगाए गए हैं, उसे यमुना की बॉयोडायवर्सिटी को ठीक करने में खर्च किया जाए। एनजीटी ने डीडीए से यह भी कहा कि अगर यमुना खादर की पारिस्थितिकी को हुए नुकसान को ठीक करने में और पैसा लगता है तो वह आर्ट ऑफ लीविंग से वसूला जाए और अगर कम खर्च होता है तो बचे हुए पैसे आर्ट ऑफ लीविंग को लौटा दिए जाएंगे।

इस मामले पर गठित विशेष्ज्ञों की कमेटी मे अपनी 47 पन्नों की रिपोर्ट में एनजीटी को बताया था कि आर्ट ऑफ लीविंग द्वारा आयोजित वर्ल्ड कल्चरल फेस्टिवल के दौरान यमुना तट को भारी नुकसान हुआ है और इसे ठीक करने में लगभग 13.29 करोड़ रुपये का खर्च आएगा और कम से कम 10 साल का समय लगेगा। आर्ट ऑफ लीविंग ने एनजीटी के इस फैसले पर निराशा जताते हुए कहा है कि वह इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे । बता दें कि यह समारोह पिछले साल 11 से 13 मार्च के बीच यमुना तट पर आयोजित किया गया था और इसमें देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा कई वरिष्ठ हस्तियों ने भी हिस्सा लिया था।

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