UP News: धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी काशी अब तकनीक के सहारे एक नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अब भीड़ और ट्रैफिक की परेशानी से काफी हद तक राहत मिलेगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्मार्ट सेंसर, डिजिटल साइनेज, कलर-कोडेड रास्तों और क्राउड इंटेलिजेंस सिस्टम की मदद से शहर में आने वाले लोगों को उनके गंतव्य तक आसानी से पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
यह परियोजना विशेष रूप से वाराणसी जैसी घनी आबादी और संकरी गलियों वाले ऐतिहासिक शहर को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब इसे बड़े स्तर पर लागू किया जा रहा है।
दुनिया के चुनिंदा शहरों में शामिल हुआ वाराणसी
टोयोटा मोबिलिटी फाउंडेशन की ‘सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज’ पहल के तहत वाराणसी का चयन दुनिया के सैकड़ों शहरों में से किया गया था। इस वैश्विक प्रतियोगिता में वेनिस और डेट्रॉइट जैसे शहर भी शामिल थे।
प्रारंभिक चरण में 10 कंपनियों ने अपने समाधान प्रस्तुत किए थे, जिनमें से अब चार कंपनियों का चयन किया गया है। ये कंपनियां शहर में ट्रैफिक प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और स्मार्ट नेविगेशन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों को लागू करेंगी।
AI पहले ही बता देगा कहां लगेगी भीड़
परियोजना के तहत काशी में AI आधारित सेंसर और स्मार्ट कैमरों का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। फिलहाल शहर में 8 AI सेंसर लगाए जा चुके हैं, जिन्हें भविष्य में बढ़ाकर 50 से अधिक किया जाएगा।
सिटी डेटा के अनुसार, यह प्रणाली बिग डेटा और जेनरेटिव AI की मदद से भीड़ और ट्रैफिक के पैटर्न का विश्लेषण करेगी। इससे प्रशासन को लगभग चार घंटे पहले ही संभावित भीड़ का अनुमान मिल जाएगा। यह जानकारी सीधे काशी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर तक पहुंचेगी, जिससे पुलिस और प्रशासन समय रहते ट्रैफिक डायवर्जन और सुरक्षा संबंधी कदम उठा सकेंगे।
रंग-बिरंगी लाइनें दिखाएंगी मंजिल का रास्ता
काशी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अब रास्ता ढूंढना भी आसान होगा। शहर की प्रमुख सड़कों और गलियों में कलर-कोडेड नेविगेशन सिस्टम विकसित किया जा रहा है।
- पीली लाइन श्रद्धालुओं को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर तक ले जाएगी।
- नीली लाइन सीधे गंगा घाटों का मार्ग बताएगी।
- लाल लाइन यात्रियों को पिकअप पॉइंट तक वापस पहुंचाने में मदद करेगी।
इसके अलावा गलियों में म्यूरल पेंटिंग, संकेतक और डिजिटल साइनेज लगाए जाएंगे, जो भीड़ अधिक होने पर यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग भी सुझाएंगे।
पर्यटन और सुरक्षा दोनों को मिलेगा लाभ
पिछले कुछ वर्षों में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, सड़क चौड़ीकरण, रिंग रोड, फ्लाईओवर, रोपवे और पार्किंग जैसी परियोजनाओं के बाद वाराणसी में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है। अब AI आधारित यह स्मार्ट प्रणाली न केवल यात्रा को अधिक सहज बनाएगी, बल्कि भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन को भी नई मजबूती देगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल वाराणसी को देश के सबसे आधुनिक धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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