यूरोप दौरे पर PM मोदी का बड़ा कूटनीतिक मिशन, नीदरलैंड्स से स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप; अब स्वीडन में ट्रेड-टेक और डिफेंस पर फोकस

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूरोप दौरे ने भारत की वैश्विक कूटनीति और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दे दी है। नीदरलैंड्स की राजधानी द हेग में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच हुई अहम बैठक में दोनों देशों ने अपने संबंधों को “स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” तक विस्तारित करने का ऐलान किया।

इस दौरान रक्षा, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा सुरक्षा, कृषि और अत्याधुनिक तकनीक समेत विभिन्न क्षेत्रों में कुल 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह दौरा केवल द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यूरोप में भारत की रणनीतिक और आर्थिक उपस्थिति को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट पर भारत-नीदरलैंड्स की साझा चिंता

बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।

प्रधानमंत्री मोदी और रॉब जेटन ने विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है।

दोनों देशों ने “फ्रीडम ऑफ नेविगेशन” यानी सुरक्षित और खुले समुद्री व्यापार मार्गों का समर्थन किया। यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिरता के दौर से गुजर रहे हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए होर्मुज स्ट्रेट की स्थिरता बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़ी मात्रा में तेल और गैस इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरती है।

रक्षा और टेक्नोलॉजी सहयोग पर बड़ा जोर

भारत और नीदरलैंड्स के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। दोनों देशों ने साइबर सिक्योरिटी, समुद्री सुरक्षा, रक्षा नवाचार और उभरती तकनीकों में साझेदारी मजबूत करने का निर्णय लिया।

इसके अलावा सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, ग्रीन एनर्जी और हाई-टेक इंडस्ट्री में संयुक्त निवेश और तकनीकी सहयोग पर भी व्यापक चर्चा हुई।

विशेषज्ञों के अनुसार, यूरोप में तकनीकी साझेदारियों को मजबूत करना भारत की दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा है, जिससे चीन पर वैश्विक निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

अब स्वीडन दौरे पर PM मोदी की नजर

नीदरलैंड्स दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब स्वीडन के गोथेनबर्ग पहुंचेंगे। पिछले आठ वर्षों में यह उनकी पहली स्वीडन यात्रा होगी। इससे पहले उन्होंने 2018 में इंडिया-नॉर्डिक समिट के दौरान स्वीडन का दौरा किया था।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बार का दौरा भारत और स्वीडन के बीच व्यापार, रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन ट्रांजिशन और सप्लाई चेन सहयोग को नई गति देने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें रक्षा सहयोग, अंतरिक्ष तकनीक, जलवायु परिवर्तन, निवेश और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

7.7 अरब डॉलर के व्यापार को मिलेगा नया विस्तार

भारत और स्वीडन के आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 7.75 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।

फिलहाल 280 से अधिक स्वीडिश कंपनियां भारत में सक्रिय हैं, जबकि 75 से ज्यादा भारतीय कंपनियां स्वीडन में कारोबार कर रही हैं।

प्रधानमंत्री मोदी यूरोपियन राउंडटेबल फॉर इंडस्ट्री कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे, जहां यूरोप की बड़ी कंपनियों के सीईओ मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि यह मंच भारत में निवेश आकर्षित करने और नई तकनीकी साझेदारियों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकता है।

यूरोप में भारत की रणनीतिक मौजूदगी मजबूत

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया तेजी से बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों से गुजर रही है। पश्चिम एशिया संकट, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और रक्षा सहयोग जैसे मुद्दों के बीच भारत यूरोप के साथ अपने रिश्तों को नई गहराई देने की कोशिश कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नीदरलैंड्स और स्वीडन जैसे देशों के साथ मजबूत साझेदारी भारत को तकनीक, रक्षा और निवेश के क्षेत्र में दीर्घकालिक लाभ पहुंचा सकती है।