भारत के मुख्य न्यायाधीश NV Ramana ने रविवार को Vijayawada के Siddhartha Law College में कहा कि संसद में पूर्ण बहुमत होना या सरकार का लोकप्रिय होना उसके मनमानी कार्यों का बचाव नहीं हो सकता। सीजेआई ने कहा कि सरकार और संसद को हर कार्रवाई को संवैधानिक दायरे में पारित करना चाहिए। वहीं उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को न्यायिक समीक्षा के तहत इस काम को सुनिश्चित करवाने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है।
देश के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) Justice NV Ramana ने यह भी कहा है कि संविधान में दिए गए अधिकार डेड लेटर नहीं हैं यह सुनिश्चित करने में अदालतों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सीजेआई रमण ने कहा कि आजादी के 75 साल और लोकतंत्र के 72 साल होने के बाद भी भारत सबसे कम उम्र का लेकिन सबसे समर्पित डेमोक्रैटिक रिपब्लिकों में से एक है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत को अपने औपनिवेशिक अतीत से दूर करना आसान काम नहीं था और आजादी के बाद हमारे देश की सबसे बड़ी चुनौती आधुनिकीकरण और मुख्य रूप से कृषि अर्थव्यवस्था से औद्योगिक क्षेत्र में गियर शिफ्ट करना था।

NV Ramana ने कहा कि अदालतों ने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
संवैधानिक अधिकारों पर न्यायमूर्ति रमना ने कहा कि अदालतों ने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने भारतीय न्यायपालिका के विकास पर भी चर्चा की और कहा कि इसने 72 साल की अवधि में कई चुनौतियों का सामना किया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका ने इस विचार को मजबूत किया है कि न्याय व्यक्ति की जरूरतों को समुदाय के कल्याण के साथ बैलेंस करने की मांग करता है और इन्हीं कारणों से आज संविधान द्वारा शासित सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में फल-फूल रहे हैं।

CJI Ramana ने स्वर्गीय लवू वेंकटेश्वरलू (Lavu Venkateswarlu) को श्रद्धांजलि दी और कहा कि वह सामाजिक चेतना वाले Entrepreneur थे। उन्होंने कहा कि श्री वेंकटेश्वरलू युवाओं को सही रास्ते पर चलने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए जाने जाते थे और इस विश्वास के प्रबल समर्थक थे कि युवाओं की अच्छी शिक्षा राष्ट्र के भविष्य को सुरक्षित करेगी।
यह भी पढ़ें: CJI NV Ramana बोले, ‘समय से न्याय न मिलना भी GDP की दर कर सकता है कम’
CJI NV Ramana ने न्यायपालिका में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण की मांग का समर्थन किया