हरियाणा सरकार ने निजी क्षेत्र की नौकरियों में स्थानीय लोगों को 75% कोटा प्रदान करने के कानून पर रोक लगाने के पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। प्रधान न्यायाधीश एनवी. रमण, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की एक पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के कथन पर गौर किया।
उच्च न्यायालय के आदेश को अपने रिकॉर्ड में रखने की हरियाणा की अपील पर सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने को वह तैयार हो गई। हाई कोर्ट ने गुरुवार को हरियाणा सरकार के फैसले पर रोक लगा दी थी।CJI ने कहा सोमवार 7 फरवरी को मामले की सुनवाई होगी।

Supreme Court : हरियाणवियों को निजी क्षेत्र की नौकरी में आरक्षण का किया था प्रावधान
न्यूज एजेंसी एएनआई (ANI) के अनुसार राज्य सरकार ने हरियाणा के लोगों को राज्य की निजी क्षेत्र की नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था। राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती दी।
समीक्षा की जा रही
हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि लिखित आदेश की समीक्षा के बाद सरकार जल्द कानूनी कदम उठा रही है। उन्होंने इसे पूरी तरह संवैधानिक रूप से दुरुस्त कानून बताया। विश्वास जताया है कि हरियाणा सरकार का स्थानीय रोजगार कानून अदालत की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पास करेगा और हरियाणा के युवाओं को रोजगार का अधिकार मिलेगा।
हरियाणा सरकार से मांगा था जवाब
गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने हरियाणा में 15 जनवरी से लागू आरक्षण कानून पर रोक लगाते हुए हरियाणा सरकार से जवाब मांगा था। गुरुग्राम और फरीदाबाद के कई औद्योगिक संगठनों ने इस कानून को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट की डिविजन बेंच पर आधारित न्यायाधीश जस्टिस अजय तिवारी और जस्टिस पंकज जैन ने कानून के अमल पर स्टे आर्डर जारी किया है।
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