मन्नतों का पर्व यानी छठ पूजा, आज सुबह उगते सूर्य को अर्ध्य देने के साथ इस महापर्व का समापन हो गया। यह पर्व नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ और चार दिन बाद सूर्यदेव की अर्ध्य के साथ समाप्त हो गया। श्रद्धालुओं ने आज सुबह घाटों के किनारे भगवान सूर्य को अर्ध्य दिया और उनकी पूजा कर मन्नतें मांगी। इस दौरान गंगा घाट से लेकर विभिन्न नदियों के तटों, तालाब और जलाशयों पर भक्तों का जन सैलाब उमड़ पड़ा।

आपको बता दें कि चार दिनों तक चलने वाला छठ पूजा के चौथे दिन भगवान सूर्य को अर्घ्य के बाद व्रतधारियों ने अन्न-जल ग्रहण कर ‘पारण‘ किया। छठ पर्व के चौथे और अंतिम दिन शुक्रवार बड़ी संख्या में व्रतधारी गंगा सहित विभिन्न नदियों के तट और जलाशयों के किनारे पहुंचे और उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर भगवान भास्कर की पूजा-अर्चना की तथा हवन किया।

जैसा कि छठ पूजा मंगलवार को नहाय खाय के बाद शुरू हुई थी। आखिर के दोनों दिन में नदी, तालाब या किसी जल स्रोत में कमर तक पानी में जाकर श्रद्धालु सूर्य को अर्घ्य देते हैं। व्रत से पहले आत्मिक शुद्धता के लिए नहाय-खाय का आयोजन होता है। छठ में के दिन षष्ठी को डूबते हुए सूर्य और सप्तमी को उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। इस दिन व्रती महिलाओं ने स्नान पूजन कर कद्दू चावल के बने प्रसाद को ग्रहण किया।

इस त्यौहार की धूम बिहार, झारखंड और यूपी समेत देश के कई हिस्सों में देखने को मिली। देश के कई बड़े शहर दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद में लोगों ने बड़ी संख्या में घाटों के किनारे सूर्य को अर्घ दिया और मन्नतें मांगी।

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तीसरे दिन शाम को डूबते सूरज को अर्ध्य देकर महिलाओं ने अपना व्रत तोड़ा। चौथे दिन सुबह महिलाओं और पुरूषों ने नदी किनारे बैठकर छठी मैय्या के गीतों का गुणगान किया और उनकी पूजा-अर्चना की। इनके अलावा आज घरों में ठेकुवा, खस्ता, पुवा आदि भी तैयार किया जाता है, जो छठ की पारंपरिक पकवानों में से एक होते हैं। पूजा-पाठ के बाद प्रसादों को लोगों में बांटा जाता है। माना जाता है कि प्रसाद खाने से सारी मनोकामना पूरी हो जाती है।

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