स्पेशल मेरिज एक्ट के तहत समलैंगिकों की शादी, Supreme Court सुनवाई को तैयार

Supreme Court : समलैंगिक कपल की ओर से दायर की गई याचिका में मांग की गई है कि स्पेशल मैरिज एक्ट को जेंडर न्यूट्रल बनाया जाए और LGBTQ+ समुदाय को सेम सेक्स मैरिज की अनुमति दी जाए।

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Supreme Court : स्पेशल मेरिज एक्ट के तहत समलैंगिक लोगों की शादी को भी मान्यता देने के मामले का सुप्रीम कोर्ट परीक्षण करने को तैयार है।जानकारी के मुताबिक, सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच इस मामले पर सुनवाई करेगी।सुप्रीम कोर्ट ने इस बाबत केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही अटार्नी जनरल को भी नोटिस भेजकर 4 हफ्ते में जवाब मांगा है, अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता दी जा सकती है या फिर नहीं।

समलैंगिक कपल की ओर से दायर की गई याचिका में मांग की गई है कि स्पेशल मैरिज एक्ट को जेंडर न्यूट्रल बनाया जाए और LGBTQ+ समुदाय को सेम सेक्स मैरिज की अनुमति दी जाए।
याचिका में यह भी कहा गया है कि एलजीबीटीक्यू समुदाय को भी अपनी पसंद के किसी भी व्यक्ति से शादी करने का मौलिक अधिकार है। हालांकि, वर्तमान में विवाह को मान्यता देने वाला कानूनी ढांचा LGBTQ+ समुदाय के सदस्यों को उनकी पसंद के लोगों से शादी करने की अनुमति नहीं देता है। यह संविधान के तहत दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में समलैंगिक लोगों की शादी को स्पेशल मैरिज एक्ट में शामिल करने की मांग की गई है।

Supreme Court on LGTBQ+
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Supreme Court : जनहित याचिका दायर

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है। इस पर वकील एनके कौल ने कहा कि केंद्र सरकार ने केरल हाईकोर्ट को बताया है कि वो सुप्रीम कोर्ट में सारे केसों को ट्रांसफर करने की अर्जी लगाएगी। CJI डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने मामले पर सुनवाई की।
दरअसल हैदराबाद में रहने वाले दो समलैंगिक पुरुषों ने विशेष विवाह अधिनियम यानी स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की है।

Supreme Court: दो याचिकाएं दायर

याचिकाकर्ताओं में से एक कपल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह एक-दूसरे से प्यार करते हैं। बीते 17 सालों से एक दूसरे के साथ संबंध में हैं।कपल दो बच्चों की परवरिश भी कर रहा है, लेकिन वे कानूनी रूप शादी नहीं कर सकते हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनकी शादी को कानूनी मान्यता न मिलने के कारण ऐसी स्थितियां पैदा हुई है, जिसके तहत वह अपने दोनों बच्चों को न ही अपना नाम दे सकते हैं और न ही उनसे कानूनी संबंध रख सकते हैं।
दूसरे मामले में हैदराबाद की दंपति सुप्रियो चक्रवर्ती और अभय दंगड़ ने शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की थी। उन्होंने विशेष विवाह अधिनियम के तहत समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की मांग की थी।

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