पूर्व सैनिकों और केंद्र सरकार के बीच ‘वन रैंक वन पेंशन’ को लेकर एक बार फिर तकरार हो सकती है। इस मामले मे सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई को दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वन रैंक वन पेंशन में किसी तरह का बदलाव नहीं हो सकता क्योंकि इससे बहुत वित्तीय बोझ पड़ेगा। केंद्र सरकार ने कोर्ट से आग्रह किया कि वो इस मामले में दखल न दे।

वन रैंक वन पेंशन के फार्मूले पर पुनर्विचार का केंद्र सरकार ने विरोध किया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वन रैंक वन पेंशन को लेकर सरकार ने पहले ही फार्मूला तय कर लिया है। केंद्र सरकार ने कहा कि सरकार जितना कर सकती थी उससे ज्यादा इसमें किया गया है अगर अब इसमें दखल दिया जाता है तो सरकार पर काफी ज्यादा वित्तिय बोझ पड़ेगा।

इससे पहले 24 अप्रैल को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वो मेजर जनरल और उसके बराबर रैंक के लिए वन रैंक वन पेंशन लागू करेगी। यह योजना सेना के सभी अंगों में लागू होगी। केंद्र सरकार ने कहा था कि वन रैंक वन पेंशन का लाभ उन रिटायर्ड सैनिकों को भी मिलेगा जो 2006 के पहले रिटायर हुए थे। केंद्र सरकार के इस हलफनामे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसे तीन महीने में लागू करने का निर्देश दिया था।

एसोसिएशन आफ एक्स सर्विसमैन ने सुप्रीमकोर्ट में याचिका दाखिल कर सरकार द्वारा घोषित वन रैंक वन पेंशन योजना पर असंतुष्टि जताई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरकार द्वारा लागू की गई वन रैंक वन पेंशन योजना कोश्यारी कमेटी की सिफारिशों पर आधारित नहीं है। सरकार ने योजना लागू करते समय कोश्यारी कमेटी की सिफारिशों को नरम कर दिया है। याचिका में मांग की गई है कि वन रैंक पन पेंशन योजना कोश्यारी कमेटी की सिफारिशों के आधार पर लागू की जाए। अब सुप्रीम कोर्ट चार हफ्ते बाद मामले की सुनवाई करेगा।

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