Atiq Ahmed: गैंगस्टर से राजनेता बने अतीक अहमद को गुजरात की साबरमती जेल से यूपी के प्रयागराज लाया गया है। 2005 में बहुजन समाज पार्टी के विधायक राजू पाल की हत्या के गवाह उमेश पाल की हत्या के बाद अतीक एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। उमेश पाल की मौत के बाद यूपी पुलिस ने अतीक, उनकी पत्नी शाइस्ता परवीन, उसके दो बेटों, उसके छोटे भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की है। गुरुवार को यूपी के झांसी में अतीक के बेटे असद को ढेर कर दिया गया है। ये तो अतीक की सुर्खियों में रहने की वजह है, पर यहां हम अतीक की गुनाहों की गली से होते हुए सियासत का सफर बताते हैं:

70 और 80 का दौर
इस कहानी की शुरुआत होती है 70 और 80 के दशक से। उस वक्त आज का प्रयागराज, इलाहाबाद हुआ करता था। यूं तो इलाहाबाद धर्म नगरी के रूप में प्रसिद्ध था, लेकिन इसके अलावा भी इलाहाबाद की एक पहचान थी वो था जुर्म। 70 के दशक में इलाहाबाद का माहौल बदलने लगा था। लोकल लड़कों में अमीर बनने की चाहत विकसित होने लगी थी। उसी दौर में इलाहाबाद के चकिया मोहल्ले में रहने वाला एक तांगेवाले का बेटा अचानक सुर्खियों में आया।
बता दें कि अतीक अहमद का जन्म 10 अगस्त 1962 को हुआ था। अतीक के पिता इलाहाबाद में तांगा चलाते थे। अतीक सिर्फ 17 साल का था जब उस पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती गई अतीक ने अपराध की दुनिया में सिक्का जमा लिया। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, अतीक अहमद पर करीब 80 मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, अपहरण, पुलिस के साथ मारपीट, हत्या का प्रयास,सरकारी काम में बाधा पहुंचाने, शांति व्यवस्था भंग करने, लाइसेंसी शस्त्र के दुरुपयोग, गुंडा एक्ट, जमीन पर जबरन कब्जा जैसे आरोप शामिल हैं। अतीक का कुनबा सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि बिहार तक में पसरा हुआ है। अतीक के खिलाफ बिहार में भी कई मामले दर्ज हैं।

अतीक की राजनीतिक यात्रा
अतीक अहमद पूर्व सांसद और पांच बार का विधायक है। उसकी राजनीतिक यात्रा 1989 में शुरू हुई। उसने इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से जीत दर्ज की। अगले दो चुनावों में सीट बरकरार रखने के बाद, अतीक समाजवादी पार्टी में शामिल हो गया। 1996 में लगातार चौथी बार सीट जीती। तीन साल बाद, अतीक अपना दल में शामिल हुआ और 2002 में एक बार फिर सीट जीत गए। 2004 में अतीक ने प्रयागराज के फूलपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। बताया जाता है कि अतीक के सिर पर यूपी के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव का हाथ था।
अतीक को पहला बड़ा झटका तब लगा जब उसे बसपा नेता राजू पाल की हत्या के मामले में आरोपी बनाया गया। राजू ने 2005 में इलाहाबाद पश्चिम सीट से अतीक के भाई अशरफ को हराया था। 25 जनवरी 2005 को राजू की उनके घर के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अतीक ने 2008 में इस मामले में आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन 2012 में जमानत पर रिहा हो गया। उसने 2014 का लोकसभा चुनाव सपा के टिकट पर लड़ा, लेकिन हार गया। अखिलेश यादव के सपा की कमान संभालने के बाद माफिया की छवि वाले अतीक को दरकिनार किया जाने लगा।
फरवरी 2017 में, अतीक को सैम हिगिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिकी और विज्ञान विश्वविद्यालय, प्रयागराज के कर्मचारियों के साथ मारपीट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वह वर्तमान में हत्या, हत्या के प्रयास, आपराधिक धमकी और हमले सहित 80 से अधिक मामलों का सामना कर रहा है।
पिछले नवंबर में, अतीक के खिलाफ एक सबसे बड़े ऑपरेशन में, प्रयागराज पुलिस ने प्रयागराज के झूंसी के हवेलिया इलाके में उसकी 123.28 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर ली थी। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, योगी आदित्यनाथ के शासन में पिछले चार वर्षों में अतीक की 300 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की गई है।
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