Achievement of India: भारत के लिए शुक्रवार का दिन बेहद खास रहा मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट Make In India Project को बड़ी सफलता हाथ लगी। Philippines ने भारतीय ब्रह्मोस एयरोस्पेस लिमिटेड BrahMos Aerospace के 374.9 मिलियन अमेरीकी डॉलर के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। मालूम हो कि फिलीपींस अपनी नौसेना के लिए शोर बेस्ड एंटी शिप मिसाइल सिस्टम परियोजना पर काम कर रहा है। जल्द ही दोनों देशों के मध्य इस समझौते पर हस्ताक्षर होंगे।
ब्रहमोस मिसाइल के लिए ये पहला विदेशी ऑर्डर

Achievement of India: इस डील की बात पक्की होते ही Philippines की सरकार ने नोटिस जारी कर रक्षा सौदा खरीद के अनुबंध को आगे बढ़ाया। ब्रह्मोस एयरोस्पेस लिमिटेड से दस दिनों के भीतर इसकी खरीद को लेकर जवाब मांगा। ब्रह्मोस मिसाइल के लिए ये पहला विदेशी ऑर्डर है।
चीन के साथ चल रहा का विवाद
दक्षिण चीन सागर में अधिकार क्षेत्र को लेकर चीन के साथ फिलीपींस का विवाद चल रहा है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक ब्रह्मोस का इस्तेमाल फिलीपींस अपने रक्षा क्षेत्र में कर सकता है। इससे जहां एक ओर चीन को करारा झटका लगा है। दूसरी तरफ भारत को अपनी जमीन पर निर्मित क्रूज मिसाइल को विश्वपटल पर लाने में बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। फिलीपींस ने चीन के खिलाफ सैन्य तैयारी को लेकर भारत और रुस द्वारा संयुक्त रूप से बनाई गई ब्रहमोस मिसाइल पर अपना भरोसा जताया है।

भारत को मित्र देशों से मिल सकते हैं खरीद के ऑर्डर
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन DRDO और ब्रह्मोस एयरोस्पेस लिमिटेड स्वदेशी निर्मित मिसाइल मित्र देशों को निर्यात करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। हालही में DRDO अमरीका के साथ मेड इन इंडिया रडार का सौदा भी कर चुका है। भारत को अपने मित्र देशों से इसी क्रम में रक्षा उपकरण खरीद के अन्य सौदों पर भी कामयाबी मिलने की उम्मीद है।
Achievement of India: 290 किलोमीटर है मारक क्षमता
फिलीपींस के साथ किए गए अनुबंध में तीन बैटरी की डिलीवरी के लिए ऑपरेटर्स और मेंटेनर्स का प्रशिक्षण भी शामिल है। मिसाइल को जमीन से, हवा से, सतह से,समुद्र से किसी चीज को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। ये समुद्र में भी टारगेट पर सटीक निशाना लगाने में माहिर है। फिलीपींस जो मिसाइल खरीद रही है उसकी मारक क्षमता 290 किलोमीटर है। यह 300 किलोग्राम वजनी युद्ध का सामान ले जा सकती हैा ब्रह्मोस एयरोस्पेस के अधिकारियों का कहना है कि देश ने आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम उठाया है। यही वजह है कि कई रक्षा उपकरणों के आयात पर रोक भी लगाई है।
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