गर्भावस्‍था के दौरान खुद को न करें नजरअंदाज इन नियमों का करें पालन, आराम के साथ बनी रहेगी Fitness

Fitness: हाल ही में किए गए अध्‍ययन के अनुसार गर्भावस्‍था के दौरान नियमित व्‍यायाम का लाभ गर्भवती महिलाओं के साथ गर्भ में पल रहे बच्‍चे को भी मिलता है। एक तरफ जहां नियमित व्‍यायाम करने मात्र से महिलाओं का मन खुश रहता है, बॉडी पॉस्‍चर ठीक रहता है, पीठ दर्द और तनाव घटता है।

0
58
Fitness: at the time of Pregnancy
Fitness:

Fitness: गर्भावस्‍था हर महिला के जीवन में एक ऐसा दौर होता है जब शारीरिक परिवर्तन के साथ नए अनुभवों का भी अहसास होता है। ऐसे में हर मां बनने वाली महिला को कमर दर्द, उलटी, कब्‍ज, मूड स्‍वींग्‍स, नींद न आने जैसी कई समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है।ऐसे में घबराने की बजाय किसी अच्‍छे डॉक्‍टर की सलाह के साथ बेहद जरूरी है कुछ हल्‍के फुल्‍के व्‍यायाम की।

हाल ही में किए गए अध्‍ययन के अनुसार गर्भावस्‍था के दौरान नियमित व्‍यायाम का लाभ गर्भवती महिलाओं के साथ गर्भ में पल रहे बच्‍चे को भी मिलता है। एक तरफ जहां नियमित व्‍यायाम करने मात्र से महिलाओं का मन खुश रहता है, बॉडी पॉस्‍चर ठीक रहता है, पीठ दर्द और तनाव घटता है। वहीं सामान्‍य प्रसव की संभावनाओं में भी इजाफा होता है। अधिकतर प्रसूति और महिला रोग विशेषज्ञों का मानना है कि हर गर्भवती महिला को हर रोज कम से कम 30 मिनट तक कोई न कोई शारीरिक गतिविधि जरूर करनी चाहिए।

Fitness during Pregnancy.
Fitness during Pregnancy.

Fitness: जानिए कौन से हल्‍के व्‍यायाम आपके लिए लाभप्रद रहेंगे?

Fitness during Pregnancy top news.
Fitness during Pregnancy.

Fitness: गर्भावस्‍था का सफर पूरा नौ माह रहता है। चूंकि बदलते समय के साथ सभी की जरूरतें भी बदलती हैं और शारीरिक बदलाव भी। ऐसे में पूरे 9 माह एक जैसा व्‍यायाम भी कारगर नहीं होता। ऐसे में बेहद जरूरी है कि गर्भ की अवधि और शरीर की गतिविधि के अनुकूल ही व्‍यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का प्रयास करें।

पहली तिमाही- इस दौरान गर्भवती महिलाओं को पार्क में धीमी गति से टहलना चाहिए। इस दौरान आप कैट पोज, हल्‍की सैर के साथ ही गर्दन और कंधे घुमाने के व्‍यायाम कर सकतीं हैं।इनके करने से आपका पाचन ठीक होने के साथ ही रक्‍त प्रवाह भी ठीक रहता है। पैर और कमर के दर्द से भी राहत मिलेगी।ध्‍यान रहे किसी भी भारी-भरकम व्‍यायाम करने से परहेज करें।
दूसरी तिमाही- इस दौरान शक्ति को बढ़ाने के लिए व्‍यायाम किए जाते हैं। इस समय अपनी मुद्रा को सही करने, मांसपेशियों को आराम देने पर ध्‍यान देना बहुत जरूरी होता है। ऐसे में आप चाहें तो चाइल्‍ड पोज, वॉरियर पोज आदि कर सकती हैं।इस बात का बहुत ख्‍याल रखें कि कोई भी व्‍यायाम सख्‍ती के साथ नहीं करें।
तीसरी तिमाही-तीसरी और आखिरी तिमाही के दौरान पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत करने और आसान प्रसव के लिए स्‍क्‍वाटिंग एक्‍सरसाइज बेहतर व्‍यायाम रहेगा।

Fitness: ऐसी स्थिति में न करें व्‍यायाम

  • अगर गर्भवती को किसी भी तरह की बीमारी हो-मसलन शुगर, ह्रदय रोग।
  • अगर गर्भावस्‍था के दौरान ब्‍लीडिंग या स्‍पॉटिंग हो रही हो, तो भी ये व्‍यायाम कदापि न करें।
  • पहले कभी गर्भपात का इतिहास रहा हो, या दोबारा गर्भपात का खतरा हो।
  • अगर पहला बच्‍चा समय से पूर्व हो गया हो या समय से पहले लेबर पेन हुआ हो।

संबंधित खबरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here