अगर भारत में दिवालिया हुआ कोई क्रिप्टो एक्सचेंज तो निवेशकों के पैसे का क्या होगा?

अगर भारत में कोई एक्सचेंज संस्था अगर दिवालिया हो जाए तो क्या होगा। बता दें कि अगर ऐसा हो तो यहां के निवेशक को पैसा मिलने के चांस बहुत कम है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां अभी क्रिप्टो इंडस्ट्री को लेकर कोई रेगुलेशन नहीं है।

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आप शायद पूरी FTX तबाही के बारे में जानते होंगे? जिसने क्रिप्टो बाजार में कहर बरपाया है। FTX निवेशक अपना पैसा निकालने के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं। इतना ही नहीं, बाजार में निवेश करने वाले लोग धीरे-धीरे सिस्टम से विश्वास खो रहे हैं। FTX फिलहाल जांच के दायरे में है, बड़ी संख्या में कंपनियां नुकसान की रिपोर्ट करने के लिए आगे आ रहे हैं। चूंकि भारत दुनिया में क्रिप्टो अपनाने वालों के सबसे बड़े देशों में से एक है, इसलिए आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि क्या इस तरह की दुर्घटना से देश के क्रिप्टो उद्योग पर किस तरह का प्रभाव पड़ सकता है। तो घबराइए नहीं, यहां हम आपको इस पूरे प्रकरण के बारे में विस्तार से बताते हैं:

बता दें कि कुछ दिन पहले क्रिप्टो एक्सचेंज एफटीएक्स (FTX) के सीईओ सैम बैंकमैन-फ्रायड ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। FTX ने अमेरिका में दिवालिया कानून के तहत संरक्षण के लिए आवेदन किया है। वित्तीय संकट में फंसे इस क्रिप्टो-एक्सचेंज ने शुक्रवार 11 नवंबर को एक बयान में यह जानकारी दी है।

24 घंटे में हो चली गई संपत्ति

सैम बैंकमैन-फ्रायड को नेटवर्थ में 24 घंटे में लगभग 94 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई। उनकी संपत्ति घट कर 991.5 मिलियन डॉलर रह गई, जबकि वह 15.2 अरब डॉलर के मालिक थे। ब्‍लूमबर्ग रिपोर्ट के अनुसार, किसी भी अरबपति (Billionaire) की संपत्ति में 1 दिन में आने वाली यह सबसे बड़ी गिरावट है।

Crypto Market Update
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इतना देना होगा पैसा

FTX इस सप्ताह की शुरुआत में अरबों डॉलर के फंड की कमी के चलते अचानक धाराशायी हो गया था। यह एक्सचेंज धराशायी तब हुआ, जब बाइनेंस (Binance) इस सप्ताह की शुरुआत में इसे खरीदने की प्रस्तावित डील से पीछे हट गई और निवेशकों से 9.4 अरब डॉलर की रकम जुटा पाने में नाकाम रहा। FTX की वित्तीय समस्या के पीछे इस ट्रेडिंग फर्म का भी हाथ है और इसे FTX को करीब 10 अरब डॉलर चुकाने हैं।

अगर भारत में ऐसा हुआ तो क्या होगा?

अगर भारत में कोई एक्सचेंज संस्था अगर दिवालिया हो जाए तो क्या होगा। बता दें कि अगर ऐसा हो तो यहां के निवेशक को पैसा मिलने के चांस बहुत कम है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां अभी क्रिप्टो इंडस्ट्री को लेकर कोई रेगुलेशन नहीं है। रेगुलेटर के कोपभाजन के शिकार से बचने के लिए कोई बैंक इन क्रिप्टो एक्सचेंजों से डील भी नहीं करता। हालांकि, सरकार ने इससे जुड़ी कमाई पर टैक्स लगाना शुरू कर दिया है। लेकिन अभी क्रिप्टो करेंसी को लेकर कोई बिल पास नहीं हुआ है।

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