मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सिवनी और छिंदवाड़ा जिलों में स्थित पेंच नेशनल पार्क (Pench National Park) में एक साथ 5 शावकों में जन्म देने वाली कॉलर वाली बाघिन (Collarwali Tiger) की मौत हो गई। 30 बच्चों को जन्म देने वाली यह 17 साल की बाघिन काफी समय से बीमार चल रही थी। मध्य प्रदेश को टाइगर्स स्टेट (Madhya Pradesh Tiger State) का दर्जा दिलाने में कॉलर वाली बाघिन की अहम भूमिका थी। इस बाघिन का 2005 में जन्म हुआ था। कॉलर वाली बाघिन की मौत से सीएम शिवराज सिंह चौहान भी दुखी हैं। उन्होंने ट्वीट कर दुख व्यक्त किया है। बता दें कि एक बाघिन की औसत उम्र 8-10 साल होती है।
Madhya Pradesh CM Shivraj Singh ने जताया दुख
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CM Shivraj Singh चौहान ने ट्वीट कर लिखा कि मप्र को टाइगर स्टेट का दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली, मध्यप्रदेश की शान व 29 शावकों की माता @PenchMP की ‘सुपर टाइग्रेस मॉम’ कॉलरवाली बाघिन को श्रद्धांजलि। पेंच टाइगर रिजर्व की ‘रानी’ के शावकों की दहाड़ से मध्यप्रदेश के जंगल सदैव गुंजायमान रहेंगे।
वहीं मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी दुख जताया है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ‘सुपर मॉम’ को आखिरी सलाम। 29 शावकों को जन्म देने वाली पेंच टाइगर रिजर्व की ‘कॉलर वाली बाघिन’ की मृत्यु की खबर दुखद है। मध्यप्रदेश को मिली टाइगर स्टेट की गौरवशाली पहचान पर कोई भी चर्चा इस सुपर मॉम के महत्वपूर्ण योगदान के बिना पूरी नहीं हो सकेगी।
रिकॉर्ड वाली बाघिन
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अगले क्रम में भी पांच शावकों को जन्म दिया था। बाघिन ने इसके बाद लगातार दो बार तीन-तीन शावकों को जन्म दिया और अप्रैल 2015 में चार और नन्हे शावकों को जन्म देकर पेंच की सर्वाधिक 22 शावकों को जन्म देने वाली बाघिन बन चुकी थी। 2017 में बाघिन ने चार और शावकों को जन्म दिया था। इसी साल जनवरी में चार शावकों को जन्म दिया था।
कॉलर वाली बाघिन के नाम सबसे अधिक बच्चों को जन्म देने का रिकॉर्ड दर्ज है। इससे पहले रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में 23 शावकों को जन्म देने वाली मछली बाघिन के नाम बताया जाता था। मार्च 2008 में गले में कॉलर लगा होने के कारण इस बाघिन का नाम कॉलरवाली बाघिन पड़ा।
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