Sri Lanka Crisis: चीन के कर्ज तले दबा श्रीलंका; खाने पीने की चीजों की भारी किल्लत, ऐसी हालत में साथ दे रहा है भारत

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Sri Lanka Crisis: विदेशी मुद्रा की भारी कमी के कारण श्रीलंका वित्तीय संकट से जुझ रहा है। अब देख महत्वपूर्ण आयात के लिए भुगतान करने में असमर्थ हो गया है,जिससे देश में जीवन रक्षक दवाओं से लेकर सीमेंट तक हर चीज की भारी कमी हो गई है। हालात ऐसे हैं कि ईंधन के लिए लंबी लाइनें लग रही है।

10 घंटे तक बिजली गुल रहती है। लोग परिवार को खिलाने के लिए परेशान होते हैं। खाने-पीने वाली चिजों की कीमतें आसमान छू रही हैं। वहां के हालात ऐसे हैं कि बंदरगाह पर ट्रक भोजन और निर्माण सामग्री को अन्य शहरी केंद्रों तक नहीं ले जा सकते हैं।

Sri Lanka Crisis: 240 करोड़ डॉलर की वित्तीय मदद मुहैया करा चुका है भारत

बता दें कि श्रीलंका पर चीन का करीब-करीब 300 करोड़ डॉलर का कर्ज है। बता दें कि चीन भले ही द्वीप राष्ट्र को दोस्ती का पाठ पढ़ा रहा हो लेकिन मौजूदा संकट के दौर में भारत ही मदद कर रहा है। कई रीन्यूएबल एनर्जी प्रॉजेक्ट्स जो पहले चीन को दिए गए थे, उन्हें अब भारत आगे बढ़ा रहा है। मालूम हो कि पिछले कुछ महीनों में ही भारत उसे करीब 240 करोड़ डॉलर की वित्तीय मदद मुहैया करा चुका है।

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Sri Lanka Crisis: पहले भी हो चुकी है स्थिति बदतर

बता दें कि श्रीलंका के लोग पहली बार ऐसी हालात का सामना नहीं कर रहे हैं। इससे पहले 1970 के दशक के वैश्विक तेल संकट के दौरान, अधिकारियों ने चीनी जैसी आवश्यक चीजों के लिए राशन की किताबें जारी की। लेकिन सरकार मानती है कि 1948 में दक्षिण एशियाई राष्ट्र की स्वतंत्रता के बाद से वर्तमान आर्थिक आपदा सबसे खराब है। वहीं किसान 2016 में सूखे की चपेट में आ गए थे और तीन साल बाद ईस्टर संडे इस्लामिक बम विस्फोटों में कम से कम 279 लोग मारे गए थे, जिसके कारण विदेशी यात्रियों की ओर से रद्दीकरण की लहर दौड़ गई थी।

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कोरोनो वायरस महामारी ने पहले से ही हमलों से जूझ रहे एक पर्यटन क्षेत्र को तबाह कर दिया और विदेशों में श्रीलंकाई लोगों के प्रेषण के प्रवाह को सुखा दिया। दोनों ही विदेशी नकदी के महत्वपूर्ण स्रोत हैं, जो देश के 51 अरब डॉलर के विदेशी ऋण के आयात और सेवा के लिए आवश्यक हैं।

सफेद-हाथी परियोजना पर धन की हुई बर्बादी: थिंक टैंक के अध्यक्ष मुर्तजा जाफरजी

कोलंबो स्थित एडवोकाटा इंस्टीट्यूट थिंक टैंक के अध्यक्ष मुर्तजा जाफरजी ने कहा कि महामारी से ठीक पहले कर में कटौती की, जिसने सरकारी राजस्व को घाटा हुआ। इतना ही नहीं बिजली और अन्य उपयोगिताओं पर सब्सिडी दी गई। ये सभी कारण हैं जो आज देश के पास विदेशी मुद्रा भंडार न के बराबर है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने सफेद-हाथी परियोजनाओं पर सार्वजनिक धन को भी बर्बाद कर दिया है। वहीं कमल के आकार की गगनचुंबी इमारत भी शामिल है। इस इमारत में एक घूमने वाला रेस्तरां है जो अब निष्क्रिय है।

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Sri Lanka Crisis: सरकार के खराब नीतिगत फैसलों से बढ़ी हैं मुश्किलें

बता दें कि खराब नीतिगत फैसलों ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पिछले साल अधिकारियों ने घोषणा की कि श्रीलंका दुनिया का पहला पूरी तरह से जैविक खेती वाला देश बन जाएगा। लेकिन किसानों ने अपने खेतों को खाली छोड़कर खाद्य कीमतों को बढ़ा दिया। इसे सरकार के नीतियों के खिलाफ किसानों का जवाब माना गया है। बताते चलें कि श्रीलंका अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से राहत की मांग कर रहा है।

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