Iran-US Tension: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता पर बड़ा झटका लगा है। ईरान ने इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर अनिश्चितता गहरा गई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि तेहरान फिलहाल किसी भी नए वार्ता दौर में शामिल होने की योजना नहीं बना रहा है। उनका कहना है कि अमेरिका की “अत्यधिक और अव्यावहारिक मांगें” तथा लगातार बदलता रुख बातचीत में सबसे बड़ी बाधा बन रहे हैं।
अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप
ईरान ने अमेरिका पर कूटनीतिक वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि वह लंबे समय से भरोसे के योग्य नहीं रहा है। प्रवक्ता ने कहा कि पहले हुए दो सप्ताह के युद्धविराम के दौरान भी अमेरिका ने अपने वादों का पालन नहीं किया।
तेहरान का आरोप है कि लेबनान में युद्धविराम को लेकर सहमति बनने के बावजूद अमेरिकी कार्रवाई जारी रही, जिससे समझौते की भावना को नुकसान पहुंचा। ईरान ने यह भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालिया तनाव अमेरिकी और इजरायली सैन्य गतिविधियों का नतीजा है।
नाकेबंदी हटे बिना बातचीत नहीं
ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त नहीं करता, तब तक किसी भी प्रकार की वार्ता संभव नहीं है। ईरानी पक्ष के अनुसार, यह नाकेबंदी न केवल अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है, बल्कि यह युद्धविराम समझौते का भी उल्लंघन करती है।
ईरान ने कहा कि सकारात्मक बातचीत के लिए “व्यावहारिक गारंटी” आवश्यक है, जिसमें प्रतिबंधों को हटाने और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे ठोस कदम शामिल हों।
पाकिस्तान को सौंपा 10 सूत्रीय प्रस्ताव
दिलचस्प बात यह है कि ईरान ने पाकिस्तान को अपना 10 सूत्रीय प्रस्ताव सौंपा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह पूरी तरह कूटनीतिक रास्ते से पीछे नहीं हटना चाहता। हालांकि, इस प्रस्ताव की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
पाकिस्तान इस पूरे विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मौजूदा हालात में किसी ठोस प्रगति की संभावना कम नजर आ रही है।
अमेरिका की ओर से क्या प्रतिक्रिया?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने हाल ही में वार्ताकारों को पाकिस्तान भेजने के निर्देश दिए थे, जिससे संकेत मिला था कि वाशिंगटन बातचीत को आगे बढ़ाने के पक्ष में है।
हालांकि, ईरान का कहना है कि अमेरिका “ब्लेम गेम” खेल रहा है और जानबूझकर यह धारणा बना रहा है कि तेहरान वार्ता के लिए तैयार है, ताकि उस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा सके।
होर्मुज और क्षेत्रीय तनाव बना बड़ी चिंता
इस पूरे विवाद के केंद्र में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है। हाल के दिनों में यहां बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो वह अमेरिकी कार्रवाई का जवाब देगा। इससे क्षेत्र में टकराव और बढ़ने की आशंका है।
कुल मिलाकर, ईरान का शांति वार्ता से पीछे हटना इस बात का संकेत है कि अमेरिका-ईरान संबंधों में फिलहाल कोई नरमी नहीं आने वाली। नाकेबंदी, प्रतिबंध और सैन्य गतिविधियों के बीच कूटनीति का रास्ता और जटिल होता जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या आने वाले दिनों में दोनों पक्ष किसी साझा समाधान की दिशा में आगे बढ़ते हैं या तनाव और गहराता है।









