सेना में बढ़ी यूपी की देसी गायों के हाई प्रोटीन उत्पादों की डिमांड, NCR से बेंगलुरु-चेन्नई तक है सप्लाई

0
0

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण अब केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रनिर्माण, पोषण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का बड़ा माध्यम बनता जा रहा है। प्रदेश की देसी नस्ल की गायों के हाई प्रोटीन दूध और प्रीमियम गो उत्पादों की मांग अब भारतीय सेना तक पहुंच चुकी है।

प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर इन उत्पादों की आपूर्ति अब एनसीआर के अलावा चेन्नई, बेंगलुरु और मुंबई जैसे बड़े महानगरों तक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए की जा रही है।

सेना में बढ़ी हाई प्रोटीन दूध की मांग

पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार, योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश में देसी नस्ल की गायों के संरक्षण और आधुनिक डेयरी मॉडल को नई गति मिली है।

प्रयागराज के इंजीनियर एस. एन. द्विवेदी ने नोएडा में आधुनिक तकनीक आधारित गोशाला स्थापित कर गो सेवा और आर्थिक समृद्धि का अनोखा मॉडल तैयार किया है। उनकी डेयरी में गिर, साहीवाल समेत कई देसी नस्लों की गायों का पालन किया जा रहा है।

इन गायों के दूध में उच्च गुणवत्ता का प्रोटीन, प्राकृतिक पोषक तत्व और कैल्शियम पाया जाता है, जो सैनिकों की फिटनेस और शारीरिक क्षमता के लिए उपयोगी माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक देसी गाय का दूध शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, मांसपेशियों को मजबूत करने और ऊर्जा बनाए रखने में मददगार साबित होता है।

देशभर में ऑनलाइन सप्लाई का नेटवर्क

उत्तर प्रदेश में तैयार हो रहे इन प्रीमियम गो उत्पादों की मांग अब राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बढ़ रही है।

एनसीआर के साथ-साथ चेन्नई, बेंगलुरु और मुंबई जैसे महानगरों में फिटनेस और हेल्थ को लेकर जागरूक उपभोक्ताओं के बीच इस दूध की लोकप्रियता बढ़ी है।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और ई-कॉमर्स कंपनियों के जरिए इसकी सप्लाई देश के अलग-अलग हिस्सों तक की जा रही है। हाई प्रोटीन और प्रीमियम क्वालिटी के चलते यह दूध 165 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा है।

आइसलैंड और डेनमार्क की तकनीक से हाईटेक डेयरी मॉडल

प्रदेश में पहली बार आइसलैंड और डेनमार्क की आधुनिक डेयरी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए दूध उत्पादन और प्रोसेसिंग का वैज्ञानिक मॉडल विकसित किया गया है।

पूरी प्रक्रिया स्वच्छ और नियंत्रित वातावरण में की जाती है, ताकि दूध की पौष्टिकता और गुणवत्ता बरकरार रहे।

इसी वजह से उत्तर प्रदेश का यह मॉडल देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है और इसे आधुनिक तकनीक तथा पारंपरिक भारतीय पशुपालन का अनूठा संगम माना जा रहा है।

गो संरक्षण से रोजगार और आत्मनिर्भरता

एस. एन. द्विवेदी फिलहाल नोएडा में 200 देसी गायों की डेयरी चला रहे हैं और अब अलीगढ़ में 500 गायों की अत्याधुनिक गोशाला विकसित करने की तैयारी कर रहे हैं।

उनका कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रेरणा लेकर उन्होंने गो सेवा को रोजगार और आर्थिक समृद्धि के मॉडल के रूप में आगे बढ़ाया।

गो आधारित अर्थव्यवस्था के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और युवाओं को आधुनिक डेयरी प्रबंधन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

‘राष्ट्रसेवा’ से जुड़ता गो संरक्षण मॉडल

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के मुताबिक, प्रदेश में गोशालाओं, आधुनिक डेयरी तकनीक और डिजिटल मार्केटिंग के जरिए गो संरक्षण को नई पहचान मिली है।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना तक पौष्टिक गो उत्पाद पहुंचाना केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का भी हिस्सा है।

योगी सरकार के संरक्षण में उत्तर प्रदेश का गो आधारित मॉडल अब आत्मनिर्भर भारत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है।