उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सनातन संस्कृति को भारत की आत्मा बताते हुए कहा कि इसे कभी पराजित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई विदेशी आक्रांताओं ने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मिटाने की कोशिश की, लेकिन वे भारत की चेतना को नहीं तोड़ सके।
सोमवार को काशी विश्वनाथ धाम परिसर स्थित त्र्यंबकेश्वर बहुउद्देशीय हॉल में आयोजित “सोमनाथ संकल्प महोत्सव” कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह बात कही। इस कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल (Anandiben Patel) भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम के दौरान गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple) में आयोजित मुख्य समारोह का लाइव प्रसारण भी दिखाया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) द्वारा विशेष महापूजा, ध्वजारोहण और कुंभाभिषेक जैसे धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए।
‘सनातन मंदिरों तक सीमित नहीं, भारत की चेतना में बसता है’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि महमूद गजनवी, मोहम्मद गोरी और औरंगजेब जैसे आक्रांताओं ने भारत की धार्मिक पहचान को नष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि औरंगजेब ने बाबा विश्वनाथ के प्राचीन मंदिर को ध्वस्त कर गुलामी का प्रतीक खड़ा किया था, लेकिन वह भारत की आत्मा को मिटा नहीं सका।
सीएम योगी ने कहा, “वे यह नहीं समझ पाए कि सनातन केवल मंदिरों की दीवारों में नहीं, बल्कि भारत की चेतना में बसता है। जिन्होंने सनातन को मिटाने का प्रयास किया, आज इतिहास में उनका अस्तित्व तक नहीं बचा।”
काशी और सोमनाथ को बताया सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने काशी और सोमनाथ को भारत की सभ्यागत चेतना के दो महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि एक ओर गंगा तट पर स्थित बाबा विश्वनाथ धाम सनातन की आध्यात्मिक धारा को जीवित रखे हुए है, वहीं दूसरी ओर समुद्र तट पर स्थित सोमनाथ मंदिर भारत के स्वाभिमान और पुनर्जागरण का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि इतिहास यह संदेश देता है कि सनातन संस्कृति पर हमले हो सकते हैं, लेकिन उसे समाप्त नहीं किया जा सकता।
सोमनाथ पुनर्निर्माण को बताया राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक
सीएम योगी ने लौहपुरुष सरदार पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) का उल्लेख करते हुए कहा कि आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक था।
उन्होंने कहा कि उस समय कई बाधाएं और विरोध थे, लेकिन सरदार पटेल ने दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ मंदिर के पुनर्प्रतिष्ठा अभियान को आगे बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने भारत के प्रथम राष्ट्रपति Rajendra Prasad का भी जिक्र किया और कहा कि उन्होंने विरोध के बावजूद सोमनाथ मंदिर पुनर्प्रतिष्ठा कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।
‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की झलक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में चल रहे धार्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल महालोक, अयोध्या में श्रीराम मंदिर और सोमनाथ मंदिर जैसे प्रकल्प “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की अवधारणा को मजबूत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं ने न केवल धार्मिक आस्था को नई पहचान दी है, बल्कि पर्यटन, रोजगार और सांस्कृतिक चेतना को भी बढ़ावा दिया है।
विपक्ष पर भी साधा निशाना
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने उन ताकतों पर भी निशाना साधा, जो धार्मिक स्थलों के विकास का विरोध करती रही हैं। उन्होंने कहा कि यही लोग पहले सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के खिलाफ भी खड़े थे।
हालांकि उन्होंने किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को विपक्ष पर अप्रत्यक्ष हमला माना जा रहा है।
आध्यात्मिक विरासत को बताया भारत की शक्ति
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की असली शक्ति उसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत में निहित है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा ने सदियों से भारत को जोड़कर रखा है और यही इसकी अमरता का आधार है।









