EWS को आरक्षण देने के मामले की सुनवाई, Supreme Court ने कहा- सामान्‍य श्रेणी की सीटों में फेरबदल क्‍यों ?

Supreme Court: अटॉर्नी जनरल ने दलील देते हुए कहा कि यह 50 प्रतिशत सीमा का उल्‍लंघन नहीं है। संविधान संशोधन को तभी चुनौती दी जा सकती है, जब यह उसकी मूल संरचना का उल्‍लंघन करे।

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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्‍ल्‍यूएस को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन के खिलाफ याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई हुई। इस दौरान शीर्ष अदालत ने केंद्र से पूछा कि सामान्‍य वर्ग की 50 प्रतिशत सीटों में से 10 फीसदी सीटें ईडब्‍ल्‍यूएस को देकर इसे और कैसे घटाया जा सकता है।

मुख्‍य न्‍यायाधीश जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके.वेणुगोपाल से कई सवाल किए। पीठ ने कहा कि याचिकाओं के मुताबिक, क्रीमीलेयर के चलते सामान्‍य में आए ओबीसी वर्ग शिकायत कर रहा है कि उनका हिस्‍सा और घटा दिया गया है। वहीं सामान्‍य वर्ग ने कहा कि इस आरक्षण से उनका क्षेत्र भी संकुचित हो गया है।

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Supreme Court: याची बोले, तय आरक्षण का उल्‍लंघन

पूरे मामले में याचियों का कहना है कि ईडब्‍ल्‍यूएस को 10 फीसदी आरक्षण इंदिरा साहनी केस में तय 50 प्रतिशत सीमा का उल्‍लंघन है।इसे सुप्रीम कोर्ट ने संविधान का बुनियादी ढांचा बना दिया था।ऐसे में केंद्र सरकार इस सीमा को लांघ नहीं सकती।

Supreme Court: अटॉर्नी जनरल बोले, नहीं हो रहा आरक्षण का उल्‍लंघन

अटॉर्नी जनरल ने दलील देते हुए कहा कि यह 50 प्रतिशत सीमा का उल्‍लंघन नहीं है। संविधान संशोधन को तभी चुनौती दी जा सकती है, जब यह उसकी मूल संरचना का उल्‍लंघन करे। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का कोटा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्‍य पिछड़ा वर्ग को मिले आरक्षण को बाधित नहीं करता। इन वर्गों को बहुत लाभ दिया गया, लेकिन गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले 18 फीसदी सामान्‍य वर्ग की सुध लेने वाला कोई नहीं है।यह आरक्षण उन्‍हीं लोगों के लिए है।

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