न्यायिक अधिकारियों पर हमले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, प.बंगाल प्रशासन को नोटिस; CBI या NIA जांच और केंद्रीय बल तैनाती के दिए निर्देश

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पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों पर हुए हमले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य प्रशासन को सख्त संदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने इस घटना को न्यायपालिका के मनोबल पर सीधा हमला बताते हुए इसे “सुनियोजित और जानबूझकर किया गया कृत्य” करार दिया।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP), संबंधित जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को नोटिस जारी किया। अदालत ने इन अधिकारियों को 6 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश देते हुए पूछा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “न्यायपालिका को चुनौती”

अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह घटना केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा को चुनौती देने का प्रयास है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित न करना प्रशासन की गंभीर विफलता को दर्शाता है।

पीठ ने कहा कि इस तरह की घटनाएं न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश हैं और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

केंद्रीय बलों की तैनाती के निर्देश

कोर्ट ने चुनाव आयोग (Election Commission of India) को निर्देश दिया कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती की जाए। साथ ही, जिन अधिकारियों को अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस हो रहा है, उनके आवास पर भी सुरक्षा बलों की तैनाती करने को कहा गया है।

अदालत ने यह भी कहा कि खतरे का त्वरित आकलन कर आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं।

CBI या NIA जांच का आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जांच केंद्रीय एजेंसियों—CBI या NIA—से कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट का मानना है कि निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी की भूमिका जरूरी है।

राज्य प्रशासन की भूमिका पर सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि मुख्य सचिव, DGP और अन्य अधिकारियों ने स्थिति को संभालने में अपेक्षित जिम्मेदारी नहीं दिखाई, जिससे न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा खतरे में पड़ी।

इसके अलावा, अदालत ने राज्य के महाधिवक्ता की उस टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई, जिसमें चुनाव आयोग के खिलाफ राजनीतिक भाषा का इस्तेमाल किया गया था।

कोर्ट के प्रमुख निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई अहम निर्देश दिए:

  1. चुनाव आयोग न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षित कार्यप्रणाली के लिए केंद्रीय बल तैनात करे।
  2. चुनाव आयोग ऐसे न्यायिक अधिकारी के निवास पर भी बल तैनात करे जिन्हें अपने परिवार को खतरे की आशंका है। खतरे का तुरंत आकलन कर आवश्यक उपाय किए जाएं।
  3. चुनाव आयोग और राज्य सरकार न्यायिक अधिकारियों को सौंपे गए कार्य के सुरक्षित संचालन के लिए सभी उपाय करे।
  4. गृह सचिव, डीजीपी, जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों को सुनिश्चित करना होगा कि आपत्ति दर्ज करने के लिए 2-3 से अधिक व्यक्ति न आएं और सुनवाई के दौरान 5 से अधिक व्यक्ति न हों।
  5. मुख्य सचिव, डीजीपी और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करें।