आर्थिक या कानूनी दिक्कतों के कारण किसी को न्याय से वंचित नहीं होना चाहिए: ‘टावर ऑफ जस्टिस’ के उद्घाटन पर बोले CJI

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भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने रविवार को गुरुग्राम के नए जिला न्यायालय परिसर ‘टावर ऑफ जस्टिस’ का उद्घाटन करते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था का मूल उद्देश्य हर नागरिक तक निष्पक्ष, प्रभावी और सुलभ न्याय पहुंचाना है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति को आर्थिक, सामाजिक या कानूनी कठिनाइयों के कारण न्याय से वंचित नहीं होना चाहिए।

‘आधुनिक और मानवीय न्यायपालिका हमारा लक्ष्य’

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका को केवल तकनीकी रूप से आधुनिक बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे संवेदनशील और संविधान के मूल्यों के अनुरूप भी होना चाहिए।

उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य ऐसी न्यायपालिका का निर्माण करना है, जो तकनीक से सशक्त होने के साथ-साथ आम नागरिकों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण भी रखे।”

जनवरी 2017 में रखी गई थी परियोजना की नींव

जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कि जब वे वर्ष 2017 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश थे, तब इस परियोजना की आधारशिला रखी गई थी। उन्होंने कहा कि देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे कॉरपोरेट शहरों में शामिल गुरुग्राम में न्यायिक ढांचे को मजबूत करना समय की आवश्यकता थी, ताकि आम नागरिक और न्याय व्यवस्था के बीच की दूरी कम की जा सके।

56 कोर्टरूम, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और आर्बिट्रेशन सेंटर की सुविधा

नए न्यायालय परिसर में 56 आधुनिक कोर्टरूम, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा और सुव्यवस्थित रिकॉर्ड रूम विकसित किया गया है। इसके अलावा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधीन एक इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर स्थापित करने की भी योजना है, जो वाणिज्यिक विवादों के त्वरित समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

महिला अधिवक्ताओं की सुविधा के लिए परिसर में लगभग 1,800 वर्गमीटर क्षेत्रफल का ‘लेडीज बार रूम’ बनाया गया है, जिसमें 30 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। साथ ही, कामकाजी अभिभावकों की सुविधा के लिए चाइल्ड केयर सेंटर भी विकसित किया गया है।

लंबित मामलों पर जताई चिंता

मुख्य न्यायाधीश ने गुरुग्राम की अदालतों में लंबित मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान में यहां 24 हजार से अधिक सिविल मामले, करीब 1,000 वाणिज्यिक विवाद और एक लाख से अधिक चेक बाउंस (Negotiable Instruments Act) से जुड़े मामले लंबित हैं।

उन्होंने कहा कि बढ़ते मुकदमों के प्रभावी निस्तारण के लिए भविष्य में और अधिक न्यायालयों तथा न्यायिक अधिकारियों की आवश्यकता होगी।

‘न्यायालय की पहचान उसकी पहुंच से होती है’

CJI सूर्यकांत ने कहा कि किसी न्यायालय की वास्तविक पहचान उसकी भव्य इमारत से नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि वह आम नागरिक को कितनी आसानी से न्याय उपलब्ध करा पाता है।

उन्होंने कहा, “‘टावर ऑफ जस्टिस’ केवल एक आधुनिक भवन नहीं, बल्कि निष्पक्ष, प्रभावी और संवेदनशील न्याय प्रणाली का प्रतीक बनना चाहिए।”

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने हरियाणा सरकार, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तथा जिला न्यायपालिका का इस परियोजना को समयबद्ध रूप से पूरा करने में सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।