प्रख्यात कानूनी विद्वान और प्रोफेसर उपेंद्र बक्षी की जीवनसंगिनी, प्रेरणा बक्षी अब हमारे बीच नहीं रहीं। उनका जाना न केवल प्रोफेसर बक्षी के लिए, बल्कि उन सभी लोगों के लिए एक अपूरणीय क्षति है जो उनके स्नेह और गरिमापूर्ण व्यक्तित्व से परिचित थे। प्रेरणा जी वास्तव में अपने नाम के अनुरूप थीं—वे प्रोफेसर बक्षी के लिए जीवन भर एक सच्ची ‘प्रेरणा’ बनी रहीं।
प्रेरणा बक्षी केवल प्रोफेसर उपेंद्र बक्षी की जीवनसंगिनी ही नहीं थीं, बल्कि उनके लंबे शैक्षणिक और बौद्धिक सफर की मजबूत सहभागी भी रहीं। दोनों का साथ छह दशक से अधिक समय तक चला। इस दौरान सिडनी, दिल्ली और यूनाइटेड किंगडम के वारविक जैसे विभिन्न देशों और संस्थानों में प्रोफेसर बक्षी की शैक्षणिक यात्रा में उन्होंने हर कदम पर उनका साथ निभाया।
कुछ समय पहले ‘इंडिया लीगल’ से बात करते हुए प्रेरणा जी ने अपने और प्रोफेसर बक्षी के रिश्तों की गहराई को साझा किया था। उन्होंने कहा था: “प्रोफेसर बक्षी का एक गुण जिसने उन्हें मेरे और उनके दोस्तों के लिए बेहद प्रिय बना दिया, वह है उनकी विनम्रता और हर किसी को सम्मान देने का उनका प्रयास। मैंने भी उनसे इसी गुण को अपने भीतर आत्मसात किया है।”
वर्ष 2018 में प्रकाशित निबंध ‘Letters to Kaka: Postcard-Images of Upendra Baxi’ में प्रेरणा बक्षी सह-लेखिका के रूप में शामिल थीं। इस लेख में उन्होंने प्रो. उपेंद्र बक्षी के बौद्धिक विकास की यात्रा को उनके पिता और पुत्र के बीच हुए पत्राचार के आधार पर संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया। इस रचना में उनकी सहभागिता यह दर्शाती है कि वे केवल प्रो. बक्षी की जीवनसंगिनी ही नहीं थीं, बल्कि उनके बौद्धिक और वैचारिक जीवन की सक्रिय, जिम्मेदार और समान भागीदार भी थीं। दोनों का रिश्ता साझा मूल्यों, सहयोग और उपलब्धियों पर आधारित एक सशक्त साझेदारी का उदाहरण था।
महाद्वीपों और दशकों में फैले इस साझा जीवन का अंत प्रोफेसर बक्षी के लिए एक ऐसा शून्य छोड़ गया है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। प्रेरणा जी की कमी प्रोफेसर बक्षी के साथ-साथ उन सभी सहकर्मियों और शुभचिंतकों को हमेशा खलेगी, जिन्होंने उनके इस गरिमामय सफर को करीब से देखा है।









