
Pollution Live Update: देश की राजधानी Delhi में जैसे ही ठंड ने दस्तक दी है। वैसे ही दमघोटूं हवा एक बार फिर फिजाओं में तैरने लगी है। हर साल के इतर इस साल तो दिल्ली की आबोहवा दीवाली (diwali) से पहले ही खराब नजर आने लगी है। यही कारण है कि कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स खतरे के निशान को पार कर गया है। जिसके कारण यहां रहने वाले लोगों को सांस लेने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रह है।
बुधवार शाम 4 बजे दिल्ली में AQI 275 दर्ज किया गया है। गाजियाबाद में 203 दर्ज किया गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक, राजधानी में सोमवार को 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 289 दर्ज किया गया था। यह रविवार को 289 और शनिवार को 268 दर्ज किया गया था। दिल्ली के पड़ोसी शहरों में भी एक्यूआई बेहद खराब की स्तर में रहा था। यह फरीदाबाद में 306, गाजियाबाद में 334, नोएडा में 303 दर्ज किया गया।
क्या होती है हवा की गुणवत्ता
हवा की गुणवत्ता शून्य और 50 के बीच में है तो इसे ‘अच्छा’ माना जाता है। वहीं अगर यह 51 और 100 के बीच होता है तो‘संतोषजनक कहा जाता है। वहीं 101 और 200 के बीच इसे ‘मध्यम’ और 201 से 300 के बीच ‘खराब’माना जाता है। 301 से 400 के बीच इसे ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच में इसे बहुत ही ‘गंभीर’ श्रेणी का माना जाता है।
गौरतलब है कि बीते कुछ सालों से दिल्ली सरकार लगातार यह कह रही है कि पड़ोसी राज्य हरियाणा और उत्तर प्रदेश में किसानों द्वारा खेतों में पराली जलाने से राजधानी की हवा खराब होती है। पराली की इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को मदद भी मुहैया कराई थी, इसके बावजूद पड़ोसी राज्यों में किसानों के द्वारा पराली जलाने की घटनाओं में कमी नहीं हो रही है।
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