यूपी सरकार की चेतावनी अनसुनी रही, नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत पर उठे गंभीर सवाल

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यूपी सरकार की चेतावनी अनसुनी रही, नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत पर उठे गंभीर सवाल
यूपी सरकार की चेतावनी अनसुनी रही, नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत पर उठे गंभीर सवाल

उत्तर प्रदेश के हाईटेक शहर नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद प्रशासनिक लापरवाही को लेकर मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। जांच के बीच अब सिंचाई विभाग की एक पुरानी चिट्ठी सामने आई है, जिसने नोएडा अथॉरिटी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि इस पत्र में दी गई सलाह पर समय रहते अमल किया गया होता, तो संभव है कि युवराज की जान बचाई जा सकती थी।

दरअसल, वर्ष 2023 में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने नोएडा प्राधिकरण को सेक्टर 150 क्षेत्र में अतिरिक्त जल निकासी की जरूरत को लेकर औपचारिक रूप से आगाह किया था। विभाग ने इस इलाके में हेड रेगुलेटर के निर्माण की सिफारिश की थी, ताकि बारिश और आसपास की सोसाइटियों से निकलने वाले अतिरिक्त पानी को नियंत्रित कर हिंडन नदी में प्रवाहित किया जा सके। हालांकि, बजट उपलब्ध होने के बावजूद यह परियोजना शुरू नहीं की गई।

हेड रेगुलेटर जल प्रवाह को नियंत्रित करने का अहम ढांचा होता है, जिससे नालों और नहरों में गाद जमने से भी बचाव होता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यह संरचना बना दी गई होती, तो घटनास्थल पर पानी जमा होने के बजाय बह जाता और यह हादसा टल सकता था।

शनिवार तड़के घने कोहरे के बीच युवराज मेहता की कार फिसलकर सेक्टर 150 में एक निर्माणाधीन व्यावसायिक परिसर के पास पानी से भरे गहरे गड्ढे में जा गिरी। यह गड्ढा तहखाने के निर्माण के लिए खोदा गया था, जो नाले की सीमा तोड़कर बनाया गया था। लगातार बारिश और आसपास के नालों से निकलने वाले पानी के कारण यह गड्ढा पूरी तरह जलमग्न हो गया था।

नोएडा प्राधिकरण के एक अधिकारी ने दावा किया कि उन्हें सिंचाई विभाग की उस चिट्ठी की जानकारी नहीं है, जिसकी प्रति समाचार एजेंसी पीटीआई के पास मौजूद है। वहीं, युवराज के पिता राज कुमार मेहता ने स्थानीय अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

पुलिस ने इस मामले में दो रियल एस्टेट डेवलपर्स—मेसर्स विशटाउन प्लानर्स और लोटस ग्रीन्स—के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। शिकायत के अनुसार, निर्माण स्थल पर करीब 50 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था, जो समय के साथ झील या तालाब में तब्दील हो गया। यूपी सरकार ने भी पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए हैं।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उन्होंने पहले भी जलभराव, नाले के पास सुरक्षा इंतजामों की कमी और बैरिकेड न होने की शिकायतें की थीं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। हादसे के बाद विरोध प्रदर्शन तेज हुए, जिसके बाद अब जाकर नोएडा प्रशासन ने निर्माण स्थल के चारों ओर बैरिकेडिंग कराई है।

यह मामला एक बार फिर शहरी नियोजन, सुरक्षा मानकों और सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी को उजागर करता है, जिसकी कीमत एक युवा इंजीनियर को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।