देश में लगातार बढ़ रही है ट्यूशन लेने वाले छात्रों की संख्या, जानिए भारत में शिक्षा को लेकर क्या खास है ASER की रिपोर्ट में…

ASER की रिपोर्ट बताती है कि, 6 से 14 साल की आयु वर्ग के बच्चों के एनरोलमेंट में सुधार हुआ है, जो 2018 के 97.2 फीसदी के मुकाबले 2022 में बढ़कर 98.4 फीसदी हो गया है।

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देश में लगातार बढ़ रही है ट्यूशन लेने वाले छात्रों की संख्या, जानिए भारत में शिक्षा को लेकर क्या खास है ASER की रिपोर्ट में... - APN News
ASER 2022

देश में शिक्षा की स्थिति को लेकर बुधवार 18 जनवरी 2023 को शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट (ASER) को जारी कर दिया गया है। ASER – 2022 एक राष्ट्रव्यापी नागरिक-नेतृत्व (Citizen-led) वाला ग्रामीण घरेलू सर्वेक्षण है, जिसके तहत भारत के 616 जिलों के 19,060 गांवों में लगभग 6,99,597 बच्चों और 3,74,544 घरों का सर्वेक्षण किया गया है। इस सर्वेक्षण ‘प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन’ द्वारा किया गया है। कोरोना के चलते चार साल बाद इतने बड़े पैमान पर यह सर्वेक्षण किया गया है।

देशभर (India) के 616 जिलों के सरकारी स्कूलों में किए गए इस ASER सर्वेक्षण के अनुसार देश में हाजिरी (Attendance) के मामले में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार सबसे पीछे हैं। बुधवार को जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार देशभर में स्कूलों में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और सिर्फ 2 फीसदी बच्चे ही ऐसे हैं, जिन्होंने दाखिला नहीं लिया है।

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क्या कुछ खास है ASER सर्वे में?

सबसे कम उपस्थिति वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, त्रिपुरा हैं, वहीं महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु ऐसे राज्य हैं जहां सबसे अधिक अटेंडेंस दर्ज की गई है। इसके साथ ही सर्वेक्षण से ये भी पता चलता है कि स्कूलों में छात्र और शिक्षक दोनों की हाजिरी स्थिर रही है। बच्चों की उपस्थिति का आंकड़ा जहां 72 फीसदी के करीब है, तो वहीं शिक्षकों के मामले में यह आंकड़ा 85 फीसदी के करीब है।

6 से 14 साल की आयु वर्ग के बच्चों के एनरोलमेंट में हुआ सुधार

असर की रिपोर्ट बताती है कि, 6 से 14 साल की आयु वर्ग के बच्चों के एनरोलमेंट में सुधार हुआ है, जो 2018 के 97.2 फीसदी के मुकाबले 2022 में बढ़कर 98.4 फीसदी हो गया है। रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, 2018 से 2022 के दौरान सरकारी स्कूलों में एनरोलमेंट में 7.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।

ASER रिपोर्ट में जिस बात को लेकर सबसे ज्यादा चिंता जताई जा रही है वो है ट्यूशन लेने वाले छात्रों में बढ़ोतरी होना। 2018 से 2022 के बीच देश के सभी राज्यों में ट्यूशन क्लासेस लेने वाले छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। लेकिन, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और त्रिपुरा में कोई बदलाव दर्ज नहीं किया गया है।

ASER 2022
ASER 2022

ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें तो सिर्फ 2 फीसदी ही बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने स्कूल में दाखिला नहीं लिया है। कोरोना महामारी के चलते लंबे समय तक स्कूलों के बंद रहने के बावजूद 2018 और 2022 के बीच स्कूल में दाखिला नहीं लेने वाले बच्चों के अनुपात में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।

ASER की निदेशक विलीमा वाधवा ने रिपोर्ट को जारी करते हुए कहा कि, “2020 में आई कोरोना महामारी के दौरान लंबे समय तक स्कूल बंद रहे, जिसको कारण काफी बच्चों ने तो स्कूल जाना ही छोड़ दिया। महामारी के प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए अब तक कोई डेटा मौजूद नहीं था। ASER 2022 सर्वेक्षण महामारी के प्रभाव को समझने के लिए उपयोगी होगा।”

बढ़ रही है तकनीक की पहुंच

ASER की रिपोर्ट के अनुसार देशभर में नामांकित छात्रों के घरों में स्मार्टफोन की उपलब्धता 2018 के मुकाबले 2021 में लगभग दोगुनी हो गई है। 2018 में जहां यह 36.5 फीसदी थी जो 2021 में बढ़कर 67.6 फीसदी हो गई है। इसके साथ ही यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि ऑफलाइन कक्षाओं को फिर से शुरू करने के बाद यह संख्या फिर से घट सकती है। वहीं 2018 के 66.5 फीसदी मुकाबले साल 2022 में 68.9 फीसदी स्कूलों में खेल के मैदान उपलब्ध हैं। कक्षा 5 से कक्षा 8 के छात्रों पर किए गए सर्वेक्षण से पता चला है कि पढ़ने के मामले में लड़कियां बेहतर कर रही हैं, जबकि गणित के मामले में लड़कों का प्रदर्शन ज्यादा अच्छा है।

कई सुविधाओं को अब भी अभाव

ASER रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के 23.9 फीसदी स्कूलों में पीने के लिए पानी तक उपलब्ध नहीं है। साथ ही लगभग 23.6 फीसदी स्कूलों में विद्यार्थी शौचालय की सुविधा का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018 में 74.2 फीसदी स्कूलों में प्रयोग करने योग्य शौचालय उपलब्ध थे जो वर्ष 2022 में बढ़कर 76.4 हो गए। इसी तरह वर्ष 2018 में 74.8 फीसदी स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा थी जो वर्ष 2022 में बढ़कर 76 फीसदी हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के 93 फीसदी स्कूलों में बिजली का कनेक्शन है। 89.4 फीसदी स्कूलों में मध्याह्नन भोजन के लिये रसोई सुविधा उपलब्ध हैं।

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