Joshimath Sinking: आखिर क्‍यों दरक रहे हैं देवभूमि में पहाड़? जानिए कुदरत से छेड़छाड़ का परिणाम

Joshimath Sinking: मालूम हो कि पहाड़ में भू-धंसाव का मामला कोई नया नहीं।इससे पहले भी यहां के कर्णप्रयाग जिले में घरों में दरारें आईं थीं। कर्णप्रयाग- नैनीसैंण मोटर मार्ग के स्‍कबर भी बंद हो गए थे।

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Joshimath Sinking

Joshimath Sinking: पिछले एक दशक से अधिक समय बीत चुका है, देवभूमि में आपदाएं कम होने का नाम ही नहीं ले रहीं। हाल में जोशीमठ में जमीन धंसने और मकानों में आ रही दरार की खबरों ने सभी का ध्‍यान केंद्रित किया है।लेकिन यह तो एक बानगी भर है।ऋषिकेश, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग, उत्‍तरकाशी और नैनीताल के लोग भी इस खबर से परेशान हैं।

भू-धंसाव का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि जोशीमठ से कुछ दिन पूर्व ही बदरीनाथ हाईवे के किनारे बसे इलाकों में भी भू-धंसाव जारी है। यहां के करीब 25 मकानों के अंदर गहरी दरारें पड़ चुकीं हैं। दहशत के चलते कई लोग यहां से पलायन भी कर चुके हैं। वहीं कुछ डर के साये में जिंदगी जीने को विवश हो गए हैं।

पहाड़ों में जमीन धंसने के मामले पिछले कुछ सालों के दौरान तेजी के साथ बढ़ें हैं। बावजूद इसके न तो यहां प्राकृतिक दोहन में किसी प्रकार की कमी आई और न ही प्रशासन के सतर्क होने की।जिसका खामियाजा यहां के स्‍थानीय लोगों को उठाना पड़ रहा है।पर्यावरण को नुकसान का सीधा असर अब आम आदमी की जिंदगी में देखने को मिल रहा है।

Joshimath Sinking ad Environment news.
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Joshimath Sinking: नहीं खुलीं PWD की आंखें

मालूम हो कि पहाड़ में भू-धंसाव का मामला कोई नया नहीं।इससे पहले भी यहां के कर्णप्रयाग जिले में घरों में दरारें आईं थीं। कर्णप्रयाग- नैनीसैंण मोटर मार्ग के स्‍कबर भी बंद हो गए थे। बावजूद इसके लोक निर्माण विभाग ने इन्‍हें खोलने की जहमत नहीं उठाई। फलस्‍वरूप सड़क का पानी यहां के मकानों में पड़ी दरारों में रिसने लगा।यही प्रक्रिया अभी भी जारी है।

Joshimath Sinking: 3 दशक बाद भी नहीं उबर सका उत्‍तरकाशी

Joshimath Sinking in Uttarakhand.
Joshimath Sinking.

प्रशासन की गलतियों का खामियाजा यहां के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। कोई 3 दशक पूर्व यहां आए प्रलयकारी भूकंप में सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी। 20 अक्‍टूबर 1991 में आए भूकंप के बाद से ही यहां की जमीन लगातार धंस रही है। प्रशासन की सुस्‍ती के चलते अभी तक लोगों का विस्‍थापन ही पूरा नहीं हो सका। प्रशासन ने पिछली घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया।

Joshimath Sinking: नैनीताल में भूस्‍खलन का मंडरा रहा खतरा

प्रसिद्ध पर्यटक स्‍थल और सरोवर नगरी नैनीताल के हालात भी किसी से छिपे नहीं हैं। यहां बना बलिया नाला पिछलेइ 155 वर्षों से दरक रहा है। इस दरमियान कई प्रशासक आए और गए, लेकिन कोई हल नहीं निकाल पाए। यहां का मशहूर बैंड स्‍टैंड जहां से कई लोगों की असंख्‍य यादें जुड़ीं हुई हैं पिछले 6 माह से बद है।

भूस्‍खलन के चलते सरोवर नगरी की जमीन दरकती जा रही है। दो वर्ष पूर्व ही माल रोड से जुड़ी सड़क भी तालाब में समा चुकी है। बावजूद इसके प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
जानकारी के अनुसार वर्ष 1867 में पहली बार यहां भूस्‍खलन हुआ। जिसमें बीरभटटी, ज्‍योलीकोट रोड खराब हो गई थी। इसके बाद वर्ष 1898 में हुए भूस्‍खलन में करीब 20 से अधिक लोगों की मौत हुई। 1924 में आए भूस्‍खलन से एक महिला समेत दो पर्यटक मारे गए।बाद में प्रशासन ने बलिया नाले के सुधार के लिए कई योजनाएं बनाईं। करोड़ों रुपये के प्रोजेक्‍ट भी बनाए गए, लेकिन सब व्‍यर्थ हुआ।

Joshimath Sinking: जानिए उस रिपोर्ट के बारे में जिसने बताया जोशीमठ के बारे में

जानकारी के अनुसार जोशीमठ में भू-धंसाव को लेकर 43 वर्ष पूर्व ही एक रिपोर्ट पेश की गई थी।केंद्र सरकार की ओर से गढ़वाल के तत्‍कालीन कलेक्‍टर एमसी मिश्रा को जोशीमठ के डूबने की पूरी जानकारी जुटाने को कहा गया था।उनके नेतृत्‍व वाली 18 सदस्यीय टीम ने जो रिपोर्ट पेश की।
उसमें साफतौर पर इस बात का जिक्र था कि जोशीमठ एक पुराने भूस्खलन क्षेत्र पर स्थित है। ऐसे में यहां निर्माण को तुरंत प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाए, अगर समय रहते ऐसा नहीं होगा तो घातक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

Joshimath Sinking:जानिए रिपोर्ट के बारे में विस्‍तार से

रिपोर्ट में बताया गया कि जोशीमठ रेत और पत्थर का जमाव है।यहां मुख्य चट्टान नहीं है, इसलिए यह एक बस्ती के लिए उपयुक्त नहीं है। यहां लगाता की जा रही ब्लास्टिंग, भारी यातायात आदि का असर प्राकृतिक कारकों में असंतुलन की स्थिति उत्‍पन्‍न करेगा।
दूसरा यहां उचित जल निकासी सुविधाओं का अभाव है।जोकि भूस्खलन की प्रमुख वजह बनता है।रही सही कसर यहां बने सोख्ता गड्ढों ने पूरी कर दी है। जो पानी को धीरे-धीरे जमीन में सोखता है।इससे पानी का रिसाव और मिट्टी का कटाव होता है, जमीन कमजोर होती है।

Joshimath Sinking: रिपोर्ट में दिए थे ये सुझाव

रिपोर्ट में कई सुझाव भी दिए गए थे, जिसमें सबसे जरूरी भारी निर्माण पर रोक लगाना था। दूसरा ढलानों की खुदाई पर भी प्रतिबंध लगाने पर जोर दिया गया।रिपोर्ट में कहा गया कि सड़क की मरम्मत और अन्य निर्माण कार्य के लिए खुदाई या विस्फोट न किया जाए।

इसके साथ ही पत्थरों को भी नहीं हटाया जाए।ऐसा नहीं करने पर भूस्खलन की संभावना बढ़ेगी। रिपोर्ट में बताया गाय कि ढलानों पर जो दरारें बन आई हैं उन्हें तत्‍काल प्रभाव से सील किया जाए।

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