Climate Change: पूरे विश्व में तेजी से बढ़ रहे प्रदूषण को नियंत्रित करने में कई बड़ी कंपनियां पिछड़ गईं है।क्लाइमेट चेंज को लेकर कई वैश्विक लक्ष्यों को साथलेकर चलने और नेट जीरो पॉल्यूशन के दावे हवा-हवाई साबित हुए हैं।पर्यावरण एवं प्रदूषण पर निगरानी रखने वाली एक संस्था की ओर से जारी रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की गई है।इसकी ओर से जारी रिपोर्ट में विश्व की 24 बड़ी कंपनियों की प्रगति संतोषजनक पाई गई है।
दरअसल उनके द्वारा उठाए गए कदम जलवायु लक्ष्यों के अनुकूल नहीं पाए गए हैं।इनकी जलवायु रणनीतियां अपर्याप्त और अस्पष्ट हैं।रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि इन कंपनियों के लक्ष्य 1.5 डिग्री के लक्ष्य से काफी कम हैं।जबकि ये कंपनियां खुद को क्लाइमेट लीडर के तौर पर पेश करती हैं। यहां पर दिए डाटा 1.5 डिग्री में कंपनियों को लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वर्ष 2030 तक अपने उत्सर्जन में करीब 43 फीसदी की कमी लाना अनिवार्य है,लेकिन वह महज 15 फीसदी तक ही कमी लाने में सक्षम हैं।

Climate Change: भ्रामक वादे कर पर्यावरण को पहुंचा रही नुकसान
Climate Change: पर्यावरणविदों के अनुसार प्रत्येक कंपनी की क्लाइमेट चेंज को ध्यान में रखते हुए डाटा का आकलन किया गया है।इसमें कई प्रकार की खामियां मिलीं हैं।जानकारी के अनुसार अधिकतर कंपनियां भ्रामक और दुविधायुक्त वादे कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहीं हैं।जानकारी के अनुसार किसी का भी ध्यान नेट जीरो पॉल्यूशन करने में नहीं है।
Climate Change: इन संस्थानों की नीति मध्यम स्तर पर मिलीं

Climate Change: रिपोर्ट में इस बात को स्पष्ट कहा गया है कि ज्यादातर कंपनियों की नीतियां अस्पष्ट हैं। जानकारी के अनुसार ऑर्सेलर मित्तल, एप्पल, गूगल, एचएंडएम, होलसिम, माइक्रोसॉफ्ट, स्टेल्लानटिस और थेस्सेंकुरुप्पकी रणनीतियां मध्यम स्तर पर पाई गईं।जबकि सर्वे में शुमार अन्य 15 कंपनियों की नीतियां बेहद अस्पष्ट थीं।
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