हिंदी फिल्मों के शानदार गायक किशोर कुमार इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनकी यादें सब के बीच है। किशो कुमार सिर्फ गायक ही नहीं थे बल्कि वे , अभिनेता, निर्माता और स्क्रीन राइटर भी थे।
किशोर को उनकी आवाज के लिए जाना जाता है लेकिन दिलचस्प बात यह है कि उनकी करियर की शुरुआत, एक अभिनेता के रूप में 1946 में हुई थी। फिल्म का ना था शिकारी जो कि साल 1948 में रिलीज हुई थी।
किशोर कुमार ने एक्टिंग में प्रवेश कर लिया था अब बारी थी गाने की, उन्होंने साल 1948 में रिलीज़ हुई फिल्म जिद्दी के लिए किशोर पहली बार आपनी आवाज दी।
अपनी गायिकी से हर किसी का दिल जीतने वाले किशोर कुमार का आज जन्मदिन यानी बर्थ एनिवर्सरी है। 4 अगस्त, 1929 को जन्मे किशोर कुमार का असली नाम आभास कुमार गांगुली था।
किशोर कुमार की चर्चा उनके गाने और अभिनय को लेकर होती रहती थी लेकिन उतनी ही चर्चा उनके निजी जीवन पर होती थी। अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर वे कई बार सुर्खियों में बने रहे।
उनकी प्रेम कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। किशोर दा ने चार शादियां की थी। चारों की कहानियां दिलचस्प है।
किशोर कुमार ने पहली शादी रुमा देवी से की थी। लेकिन यह रिश्ता काफी समय तक चला नहीं दोनों आपसी अनबन के कारण जल्द ही जुदा हो गए। अपनी पहली शादी के दौरान किशोर कुमार की उम्र 21 साल थी। पहली शादी में किशोर ने 8 साल बाद ही तलाक ले लिया। इस शादी से उन्हें एक बेटा अमित कुमार हुआ।
पहली शादी के बाद किशोर कुमार ने हिंदी फिल्म जगत की सबसे खूबसूरत अभिनेत्री मधुबाला को दिल दिया। दोनों ने कुछ समय बाद शाद कर ली। मधुबाला के लिए उन्होंने अपना धर्म भी बदल लिया था और अपना नाम ‘करीम अब्दुल’ रख लिया। कुछ सालों बाद मधुबाला ने दुनिया को अलविदा कह दिया।
किशोर कुमार को मधुबाला से इतना प्यार था कि उन्होंने अपने धर्म तक को त्याग दिया था। लेकिन किस्मत को दोनों का साथ मंजूर नहीं था। किशोर से शादी के बाद मधुबाला ने दुनिया को अलविदा कह दिया।
किशोर ने 1976 में अभिनेत्री योगिता बाली के साथ तीसरी दफा शादी की। लेकिन यह शादी भी ज्यादा दिन तक नहीं चल सकी और दो साल के अंदर ही यह रिश्ता खत्म हो गया। साल 1980 में उन्होंने चौथी और आखिरी शादी लीना चंद्रावरकर से की। लीना किशोर कुमार से उम्र में 21 साल छोटी थीं।
किशोर कुमार मध्य प्रदेश के खंडवा के रहने वाले थे। 18 अक्तूबर 1987 को दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई। किशोर कुमार के पार्थिव शरीर को उनकी मातृभूमि खंडवा में ही दफनाया गया। किशोर दा को खंडवा बेहद प्यारा था। उनका यहां पर दिल बसता था यही कारण है कि आखिरी वक्त में उन्हें वहीं दफनाया गया।