UP News: उत्तर प्रदेश सरकार श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने, कौशल विकास को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में लगातार बड़े कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रमिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा करते हुए स्पष्ट कहा कि श्रमिक केवल उत्पादन व्यवस्था का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि राज्य की आर्थिक प्रगति और विकास की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता श्रमिकों, युवाओं और कमजोर वर्गों को सम्मानजनक जीवन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित कार्यस्थल और बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण योजनाओं के विस्तार और सुधार से जुड़े निर्देश जारी किए। इनमें बाल श्रमिक विद्या योजना का पूरे प्रदेश में विस्तार, सेवामित्र व्यवस्था को और प्रभावी बनाना, निर्माण श्रमिकों के लिए आधुनिक सुविधा केंद्र विकसित करना तथा रोजगार मिशन को अंतरराष्ट्रीय अवसरों से जोड़ना प्रमुख रहा।
बाल श्रमिक विद्या योजना अब 75 जिलों तक पहुंचेगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक अभाव किसी भी बच्चे की शिक्षा में बाधा नहीं बनना चाहिए। इसी सोच के साथ सरकार बाल श्रम प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाने की तैयारी कर रही है, ताकि बच्चों को स्कूलों से जोड़ा जा सके और उनका प्रभावी पुनर्वास हो सके।
बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2020 में शुरू की गई बाल श्रमिक विद्या योजना वर्तमान में 20 जिलों में संचालित है, जिसके तहत 8 से 18 वर्ष आयु वर्ग के कामकाजी बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाकर आर्थिक सहायता दी जाती है। मुख्यमंत्री ने अब इस योजना को नए प्रावधानों के साथ प्रदेश के सभी 75 जिलों तक विस्तारित करने के निर्देश दिए।
सेवामित्र व्यवस्था बनेगी रोजगार का डिजिटल मॉडल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘सेवामित्र’ व्यवस्था को तकनीक आधारित रोजगार और जनसेवा का एक प्रभावी मॉडल बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कुशल युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की यह व्यवस्था भविष्य की जरूरतों के अनुरूप है।
अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2021 में शुरू हुई इस व्यवस्था के तहत नागरिक मोबाइल ऐप, पोर्टल और कॉल सेंटर के माध्यम से घरेलू सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में पोर्टल पर 1097 सेवा प्रदाता, 5049 सेवामित्र और 54,747 कुशल कामगार पंजीकृत हैं।
मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि सरकारी विभागों में भी जरूरत के अनुसार इस व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाए, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकें।
निर्माण श्रमिकों के लिए बनेंगे आधुनिक सुविधा केंद्र
बैठक में निर्माण श्रमिकों के लिए प्रस्तावित श्रमिक सुविधा केंद्रों यानी ‘लेबर अड्डों’ पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन केंद्रों को केवल श्रमिकों के एकत्रीकरण स्थल के रूप में नहीं बल्कि सहायता और सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अन्य क्षेत्रों से आने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षित आवास, मूलभूत सुविधाएं और व्यवस्थित ढांचा तैयार करना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
कौशल विकास से उद्योगों को मिलेगा प्रशिक्षित मानव संसाधन
कानपुर में प्रस्तावित औद्योगिक श्रमिक प्रशिक्षण संस्थान और छात्रावास परियोजना को मुख्यमंत्री ने कौशल विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया। यहां कारपेंटरी, इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, फिटर और अन्य ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री का मानना है कि उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित युवाओं को तैयार करना समय की मांग है और इससे रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
यूपी का रोजगार मिशन अब वैश्विक स्तर तक
रोजगार के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश अब राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़कर वैश्विक अवसरों की तरफ भी कदम बढ़ा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के रोजगार मिशन को विदेश मंत्रालय से भर्ती एजेंसी का लाइसेंस मिल चुका है।
लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और कानपुर में आयोजित रोजगार कार्यक्रमों के जरिए 27,555 युवाओं का चयन किया गया है, जिनमें से लगभग 2300 युवाओं को विदेशों में रोजगार के अवसर मिले हैं।
इसके साथ ही जापान, जर्मनी और अन्य देशों में रोजगार संभावनाओं को देखते हुए विदेशी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि रोजगार संगम पोर्टल को एआई आधारित सेवाओं, डिजिटल जॉब मैचिंग और ऑनलाइन काउंसलिंग जैसी सुविधाओं से और मजबूत किया जाए ताकि युवाओं को समय के अनुरूप अवसर मिल सकें।









