Allahabad HC : गंगा और यमुना नदी के जल में बढ़ते प्रदूषण स्तर को लेकर जारी जनहित याचिकाओं को लेकर कोर्ट सख्त हुआ है। कोर्ट ने अब तक दाखिल विभागवार हलफनामों को एक साथ टैग करने का निर्देश दिया है। इसका मकसद हर बिंदु पर हर विभाग का पक्ष सुगमता से देखा जा सकेगा। पूरे मामले की बिंदुवार सुनवाई भी हो सकेगी। कोर्ट ने गंगा प्रदूषण मामले के साथ संलग्न कई याचिकाओं को अलग कर दिया, जबकि कुछ याचिकाएं निरस्त कर दी। हाईकोर्ट में जनहित याचिकाओं पर अगली सुनवाई की तिथि 3 मार्च तय की गई है।

Allahabad HC : अलग-अलग की बजाय एक ही याचिका डालें
कोर्ट ने सभी याचिकाओं को देखते हुए कहा कि बजाय अलग-अलग याचिकाओं के इस मामले की सुनवाई के लिए एक ही याचिका डाली जाए, ताकि केस की सुनवाई सुगमता के साथ हो सके। चीफ जस्टिस राजेश बिंदल, जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस अजित कुमार की पीठ मामले की सुनवाई कर रही है।
पीठ का कहना था कि एक ही मामले में भिन्न-भिन्न याचिकाओं की बजाय एक याचिका दें, जिससे समाधान निकालने में आसानी होगी। याची अधिवक्ता विजय चन्द्र श्रीवास्तव ने माघ मेले के दौरान गंगा जल काला होने को लेकर हलफनामा दाखिल किया था। उन्होंने स्नान करने लायक पानी उपलब्ध कराने की मांग की।
Allahabad HC : नदियों का जल प्रदूषित होने पर कोर्ट सख्त
इलाहाबाद हाईकोर्ट (High Court) गंगा नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर पिछले माह भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सवाल कर चुका है। कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पूछा था कि गंगा का जल पीने लायक है या नहीं। अगर पीने लायक नहीं है, तो इसे शुद्ध बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। कोर्ट ने प्रदूषण बोर्ड को प्रयागराज माघ मेला क्षेत्र में तीन अलग-अलग जगहों से गंगा और यमुना नदी के जल से नमूने लेकर उनकी जांच करवाने और बाद में उसकी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए थे।
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