Vastu Tips: पढ़ाई के समय किस दिशा में होना चाहिए बच्चों का मुख! जानिए स्टडी रूम से जुड़े वास्तु टिप्स…

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Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में आज हम बात करेंगे स्टडी रूम यानि की अध्ययन कक्ष के रंग के बारें में। स्टडी रूम वह जगह होती है जहां हम शांति से, बिना किसी शोर के आराम से अध्ययन कर सकते हैं और इन सब चीजों के लिए स्टडी रूम का वातावरण अच्छा और शांतमय होना बहुत जरूरी है। बच्चों के स्टडी रूम में अगर वास्तु नियम का ध्यान रखा जाता है तो बच्चों को सफलता अवश्य ही मिलती है।

Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में सभी दिशाओं का एक खास महत्व बताया गया है। अगर गलत दिशा में कोई वस्तु रखी जाती है या फिर गलत दिशा में मुख करके कोई काम किया जाता है तो इससे नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ठीक उसी तरह बच्चों के स्टडी रूम से संबंधित नियम भी बताए गए हैं। इसका ध्यान रखने से बच्चों को अपना लक्ष्य प्राप्त करने में सफलता मिलती है।

स्टडी रूम से जुड़े वास्तु टिप्स | Vastu Tips:

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Vastu Tips

वास्तु शास्त्र के अनुसार अध्ययन कक्ष के लिए हमेशा हल्के रंगों का प्रयोग करना बेहतर होता है। अध्ययन कक्ष के लिए क्रीम कलर, हल्का जामुनी, हल्का हरा, आसमानी, पीला, बादामी या भूरा रंग का चयन करना चाहिए।

वास्तु शास्त्र में पढ़ाई-लिखाई करने लिए सबसे उत्तम दिशा उत्तर-पूर्व मानी गई है। बच्चों का स्टडी रूम कभी भी दक्षिण या दक्षिण-पूर्व दिशा में नहीं होना चाहिए।

इस बात का भी ख्याल रखें कि घर की सीढ़ियों के नीचे बच्चों के पढ़ने का कमरा नहीं बनवाना चाहिए। इससे उनकी पढ़ाई-लिखाई में बाधा पड़ती है।

वास्तु शास्त्र में पढ़ाई की टेबल के आकार के बारे में भी बताया गया है। टेबल हमेशा चौकोर आकार की होनी चाहिए।

बच्चे के स्टडी रूम की व्यवस्था इस तरह करें कि पढ़ते समय बच्चे का मुख उत्तर-पूर्व दिशा की ओर हो।

वास्तु शास्त्र के अनुसार कॉपी किताब को दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना चाहिए। कॉपी किताबों के लिए कभी खुले रैक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

Disclaimer: यहां दी गई सूचना सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। APN NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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