ऑल्ट न्यूज के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर को उत्तर प्रदेश के सीतापुर केस में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से जमानात मिल गई है। कोर्ट ने जुबैर को शर्तों के साथ 5 दिनों की अंतरिम जमानत देते हुए कहा कि वह न्यायिक क्षेत्र से बाहर नहीं जाएंगे और इस मामले से जुड़े कोई भी ट्वीट सोशल मीडिया पर शेयर नहीं करेंगे। सु्प्रीम कोर्ट ने Alt News के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर को आदेश देते हुए कहा है कि जुबैर न तो बेंगलुरु न ही कहीं और इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिटाने की कोशिश करेंगे।
जुबैर के खिलाफ दिल्ली में भी FIR दर्ज
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश केवल सीतापुर वाले मुकदमे पर आया है। इसका दिल्ली वाले केस से कोई भी लेना-देना नहीं है और वे दिल्ली से रिहा हो पाएंगे या नहीं, इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जुबैर के खिलाफ दिल्ली में भी FIR दर्ज है। उन्हें दिल्ली आकर सरेंडर करना होगा। अदालत ने आगे कहा कि वह डिटेल्स थोड़ी देर में अपलोड करेगी।

Supreme Court ने यूपी पुलिस को भी दिया नोटिस
बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस को भी नोटिस जारी करते हुए कहा कि छुट्टीयों के बाद इस मामले की सुनवाई समुचित बेंच के सामने होगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में अग्रिम जमानत खारिज कर दी थी और केस को रद्द करने से इनकार कर दिया था।
यूपी पुलिस ने जुबैर के खिलाफ आईपीसी की धारा-295ए (जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को आहत करना) और आईटी एक्ट की धारा-67 के तहत केस दर्ज किया है। जुबैर को दिल्ली पुलिस ने 27 जून को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले ट्वीट के मामले में गिरफ्तार किया था।

भारत ने कहा- जर्मनी बेकार के बयान से बचे
दरअसल, मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी पर जर्मनी ने भारत की आलोचना की थी। जिसका भारत ने गुरुवार को खंडन किया। भारत ने कहा कि देश की न्यायपालिका की आजादी सर्वमान्य है और बिना जाने-समझे बयान देना बेकार है और इससे बचना चाहिए।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का यह बयान जर्मनी के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के यह कहने के बाद आया है कि मोहम्मद जुबैर को परेशान नहीं करना चाहिए और न ही उन्हें जेल में बंद करना चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यह घरेलू मुद्दा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया चल रही है और इस मामले में किसी का भी बयान देना ठीक नहीं है।
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