Mulayam Singh Yadav Death: 55 वर्षों से अपने दांव-पेंच से लोगों विरोधियों को चित्त करने वाले नेता जी की हर बात निराली थीसमाजवादी पार्टी के संरक्षक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 82 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। वे पिछले काफी दिनों से खराब स्वास्थ्य के चलते गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती थे।अपने 55 वर्ष के राजनीतिक करियर में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे।कुश्ती के अखाड़े में पूरे जोश से लबरेज मुलायम ने कई पहलवानों को धूल चटाई।
राजनीति के गलियारों में भी कई दिग्गजों के साथ सत्ता को चलाया।राजनीति के हर दांव-पेंच को वे बड़े ही मुस्तैदी के साथ खेलते थे।समाजवाद के सहारे राजनीति करने वाले मुलायम के साथ आगे चलकर कई विवाद भी जुड़े, लेकिन हर परिस्थिति का सामना डटकर किया।आइए जानते हैं उनके जीवन के अनछुए किस्सों को।

Mulayam Singh Yadav Death: जब नेता जी कार्यकर्ताओं से बोले- चिल्लाओ नेताजी मर गए!
4 मार्च 1984, दिन रविवार, नेताजी की इटावा और मैनपुरी में रैली थी। रैली के बाद वो मैनपुरी में अपने एक दोस्त से मिलने गए। दोस्त से मुलाकात के बाद वो 1 किलोमीटर ही चले थे कि उनकी गाड़ी पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। गोली मारने वाले छोटेलाल और नेत्रपाल नेताजी की गाड़ी के सामने कूद गए।
करीब आधे घंटे तक छोटेलाल, नेत्रपाल और पुलिसवालों के बीच फायरिंग चलती रही। छोटेलाल नेताजी के ही साथ चलता था इसलिए उसे पता था कि वह गाड़ी में किधर बैठे हैं। यही वजह है कि उन दोनों ने 9 गोलियां गाड़ी के उस हिस्से पर चलाईं जहां नेताजी बैठा करते थे। लेकिन लगातार फायरिंग से ड्राइवर का ध्यान हटा और उनकी गाड़ी अनियंत्रित होकर सूखे नाले में गिर गई। नेताजी तुरंत समझ गए कि उनकी हत्या की साजिश की गई है। उन्होंने तुरंत सबकी जान बचाने के लिए एक योजना बनाई।उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि वो जोर-जोर से चिल्लाएं ‘नेताजी मर गए। उन्हें गोली लग गई। नेताजी नहीं रहे।’ जब नेताजी के सभी समर्थकों ने ये चिल्लाना शुरू किया तो हमलावरों को लगा कि नेताजी सच में मर गए।
Mulayam Singh Yadav Death: कारसेवकों पर चलवाई गोली
साल था 1989 लोकदल से मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।उन दिनों 90 का दौर शुरू होते-होते देशभर में मंडल-कमंडल की लड़ाई शुरू हो गई। ऐसे में 1990 में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिराने के लिए कारसेवा की। 30 अक्टूबर 1990 को कार सेवकों की भीड़ बेकाबू हो गई। कार सेवक पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ मस्जिद की ओर बढ़ रहे थे। मुलायम सिंह यादव ने सख्त फैसला लेते हुए प्रशासन को गोली चलाने का आदेश दिया।
Mulayam Singh Yadav Death: जब कांशीराम को साथ लाकर भाजपा को दी पटखनी

वर्ष 1956 में राममनोहर लोहिया और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर समझौते के तहत एकसाथ आने की योजना बना रहे थे।इसी बीच अंबेडकर का निधन हो गया। लोहिया की दलित-पिछड़ा जोड़ की योजना सफल न हो सकी।इसके कई साल गुजर जाने के बाद वर्ष 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद मुलायम ने लोहिया के इस प्लान पर काम करना शुरू कर दिया। मुलायम-कांशीराम के बीच समझौते के बाद सपा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। सपा को चुनाव में 109 सीटें मिली, जबकि बसपा 67 सीटों पर जीत हासिल की।इसके साथ ही भाजपा को जोरदार पटखनी भी दी।
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