CM Nitish Kumar: बिहार के सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) दिल्ली के दौरे पर हैं। वे यहां विपक्ष के कई बड़े नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने सीपीआई-एम के नेता सीताराम येचुरी से मुलाकात की। इस दौरान नीतीश कुमार ने कहा कि “मेरी प्रधानमंत्री बनने की कोई इच्छा नहीं है और न ही मैं इसका दावेदार हूं। बस कोशिश है कि पूरे देश में जो भी स्थानीय पार्टी हैं, वे सभी एक साथ मिल जाएं, तो बहुत बड़ी बात होगी।”

CM Nitish Kumar: प्रधानमंत्री बनने की नहीं है कोई इच्छा, दावेदारी भी नहीं !
बिहार में बीजेपी से गठबंधन तोड़कर नीतीश कुमार ने हाल ही में आरजेडी समेत सात पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाई है। बहरहाल, वे आजकल दिल्ली दौरे पर हैं। उनके हाल के बयान से पता चलता है कि वे प्रधानमंत्री बनने की कोई इच्छा नहीं रखते हैं और वे सिर्फ विपक्ष को एकजुट करना चाहते हैं। लेकिन, वहीं हम इनकी बातों पर गौर करते हुए बिहार में देखें, तो इनकी पार्टी जदयू का अलग ही रूप दिखता है। बिहार की राजधानी पटना में पार्टी ने बड़े-बड़े बैनर-पोस्टर लगाए हैं। उनपर नीतीश कुमार की तस्वीर के साथ लिखा हुआ है कि “बिहार में दिखा भारत में दिखेगा।”
“बिहार में दिखा भारत में दिखेगा।” का क्या है मतलब ?
नीतीश कुमार की तस्वीर के साथ पटना में बड़े-बड़े होर्डिंग्स पर “बिहार में दिखा भारत में दिखेगा।” लिखा हुआ है। इससे राजनीतिक विशेषज्ञ साफ तौर पर कहते हैं कि अब नीतीश कुमार केंद्र में आने की तैयारी कर रहे हैं। वे सिर्फ केंद्र में ही नहीं आना चाहते हैं बल्कि वे आगामी लोकसभा चुनाव 2024 में प्रधानमंत्री की दावेदारी पेश करना भी चाहते हैं।
वहीं बिहार में आरजेडी के नेताओं का भी कहना है कि 2024 के आम चुनाव में नीतीश कुमार, विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री के दावेदार होने जा रहे हैं। साथ ही वे पीएम नरेंद्र मोदी को कांटे की टक्कर देंगे। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या विपक्ष की ओर से नीतीश कुमार सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री के दावेदार हो सकते हैं?

प्रधानमंत्री पद के दावेदारी के लिए विपक्ष में हैं कई नेता
राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो विपक्ष में कई और भी नेता हैं, जो प्रधानमंत्री की दावेदारी की लाइन में खड़े हैं। इनमें सबसे ऊपर नाम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी का आता है। वहीं, इनके अलावा तेलंगाना के सीएम केसीआर, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी हैं। यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री देश के सबसे बड़े राज्य का ही होना चाहिए। राजनीतिक विशेषज्ञ यह भी संभावना जता रहे हैं कि आने वाले दिनों में कुछ भी हो सकता है। बहरहाल, अभी तो नीतीश कुमार ही दिल्ली और देश की राजनीति में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
क्या विपक्ष को एकजुट कर पाएंगे CM Nitish Kumar ?
सीएम नीतीश कुमार सोमवार को दिल्ली पहुंचे। दिल्ली आने से पहले वे बिहार में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से मिले। वहीं, दिल्ली आते ही उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी व जेडीएस नेता कुमार स्वामी से मुलाकात की।
सूत्रों की मानें तो, राहुल गांधी के साथ बैठक में 2024 में बीजेपी और पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा बनाने की बात बन गई है। वे अब आगे पूरे विपक्ष को एकजुट करने की तैयारी में हैं।
वहीं मंगलवार को नीतीश कुमार ने सीपीआई-एम नेता सीताराम येचुरी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी मुलाकात की। राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो वे कहते हैं कि देश में विपक्षी पार्टी जब भी मिलकर किसी मजबूत पार्टी के खिलाफ मोर्चा बनाने की कोशिश की है तो, उनमें हमेशा ही विपक्ष का चेहरा चुनने की परेशानी रही है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या नीतीश कुमार विपक्षी दलों को एक साथ ला पाते हैं? खैर, नीतीश कुमार का देश के कई और भी बड़े नेताओं से मिलने की संभावना है और इनके मुलाकात का दौर जारी है।
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