भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation) के 22वें शिखर सम्मेलन की बैठक में शामिल होने के लिए आज उज्बेकिस्तान के शहर समरकंद पहुंचेंगे. किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में जून 2019 के बाद शंघाई सहयोग संगठन का ये पहला व्यक्तिगत शिखर सम्मेलन होगा.
भारत वर्ष 2023 में शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation) के 23वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा.

प्रधानमंत्री मोदी के अलावा वहां दो अन्य देशों के नेता भी मौजूद रहेंगे, जिनके साथ भारत मुश्किलभरे रिश्ते साझा करता रहा है. सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समरकंद पहुंच चुके हैं वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ भी इस बैठक में शिरकत करेंगे.
शंघाई सहयोग संगठन में वर्तमान में आठ सदस्य देश हैं (चीन, भारत, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान), वहीं चार पर्यवेक्षक देश (अफगानिस्तान, बेलारूस, ईरान और मंगोलिया) और छह “डायलॉग पार्टनर्स” (आर्मेनिया, अजरबैजान, कंबोडिया, नेपाल, श्रीलंका और तुर्की) शामिल हैं.
शंघाई सहयोग संगठन
शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation) का गठन 15 जून, 2001 को 6 सदस्य देशों- चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान के द्वाका किया गया था. यह दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन है, जो एशिया और यूरोप में लगभग 60 फीसदी भूमि क्षेत्र को कवर करता है, इसके अलावा दुनिया की 40 फीसदी से अधिक आबादी और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 30 फीसदी से अधिक है.

शंघाई सहयोग संगठन 2005 से ही संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) में एक पर्यवेक्षक रहा है. इस अंतर सरकारी संगठन के उद्देश्यों, सिद्धांतों, संरचनाओं और संचालन के रूपों को 2002 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हस्ताक्षरित शंघाई सहयोग संगठन के चार्टर में सूचीबद्ध किया गया था. यह वर्ष 2003 में लागू हुआ था.
शंघाई सहयोग संगठन के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, जातीय अलगाववाद और धार्मिक उग्रवाद और क्षेत्रीय विकास आदि शामिल हैं.

भारत और पाकिस्तान को जून 2017 में शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation) में पूर्ण सदस्यों के रूप में शामिल किया गया था, इससे एससीओ के सदस्य देशों की संख्या 6 से बढ़कर 8 हो गई थी.
इस सम्मेलन (उज्बेकिस्तान के समरकंद) में दो नए देशों, ईरान और बेलारूस के भी शंघाई सहयोग संगठन शामिल होने की संभावना है.
भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण
शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation) भारत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. समय के साथ-साथ SCO ने सदस्यों देशों के बीच मतभेदों पर चर्चा करने के लिये उपयुक्त मंच प्रदान किया है.
शंघाई सहयोग संगठन की बैठकों के ही दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ द्विपक्षीय बैठक की वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वर्ष 2020 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी तनातनी के बीच मॉस्को में चीनी समकक्ष वांग यी के साथ बैठक के दौरान सीमा पर तनाव खत्म करने को लेकर 5 सूत्री सहमति बनी. इसके साथ ही दोनों पक्ष इस बात पर राजी हुए हैं कि बातचीत जारी रखेंगे और सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी.
हांलाकि शंघाई सहयोग संगठन का संस्थापक देश चीन चतुर्भज (QUAD) जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं, को लेकर हमेशा आशकिंत रहता है, वह सोचता है कि इसका उद्देश्य चीन बढ़ते वैश्विक प्रभाव को रोकना है.
शंघाई सहयोग संगठन का विस्तार
हाल के वर्षों में यह देखा गया है कि शंघाई सहयोग संगठन का अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव बढ़ रहा है और शंघाई सहयोग संगठन चार्टर के सिद्धांतों को व्यापक रूप से स्वीकार किया जा रहा है.

चीन और रूस, अपने प्रभुत्व वाले इस समूह को पश्चिमी देशों द्वारा अपनाई जा रही नीतियों के लिये एक काउंटर के रूप में विशेष रूप से नाटो के विस्तार के रूप में तैयार करना चाहते हैं. हालांकि ऐसा माना जाता है कि शंघाई सहयोग संगठन और नाटो के बीच काफी मतभेद है.
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का इतिहास
शंघाई सहयोग संगठन एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है. वर्ष 2001 में इसके गठन से पहले कजाखस्तान, चीन, किर्गिस्तान, रूस और ताजिकिस्तान शंघाई फाइव (Shanghai Five) के सदस्य हुआ करते थे.
शंघाई फाइव (1996) की उत्पत्ति सीमा के सीमांकन और विसैन्यीकरण बातचीत की एक श्रंखला के रूप में हुआ, जिसे चार पूर्व सोवियत गणराज्यों द्वारा चीन के साथ सीमाओं पर स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आयोजित किया गया था.
वर्ष 2001 में संगठन में उज्बेकिस्तान के शामिल होने के बाद शंघाई फाइव का नाम बदलकर शंघाई सहयोग संगठन कर दिया गया था.
कैसे काम करता है SCO
राष्ट्र प्रमुखों की परिषद
यह शंघाई सहयोग संगठन का सुप्रीम निकाय है जो अन्य राष्ट्रों एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ अपनी आंतरिक गतिविधियों के माध्यम से बातचीत कर अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करती है.

शासन प्रमुखों की परिषद
शासन प्रमुखों की परिषद शंघाई सहयोग संगठन के अंतर्गत आर्थिक क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा कर निर्णय लेती है तथा संगठन के बजट को मंज़ूरी देती है.
विदेश मंत्रियों की परिषद रोजमर्रा की गतिविधियों से संबंधित मुद्दों पर विचार करती है.
क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) आतंकवाद, अलगाववाद, पृथकतावाद, उग्रवाद एवं चरमपंथ से निपटने के मामले देखती है.
सूचनात्मक, विश्लेषणात्मक एवं संगठनात्मक सहायता प्रदान करने के लिए चीन की राजधानी बीजिंग में शंघाई सहयोग संगठन का सचिवालय बनाया गया है.
रूसी और चीनी शंघाई सहयोग संगठन की आधिकारिक भाषाएं हैं.