Pneumonia: मौसम बदलने के साथ बच्चों यहां तक की बड़ों को भी निमोनिया के खतरे से खुद को बचाकर रखना चाहिए।निमोनिया फेफड़ों को प्रभावित करने वाली एक गंभीर बीमारी है।जोकि बैक्टीरिया के संक्रमण से फैलती है। इससे पीड़ित होने पर फेफड़ों में पानी भर जाता है और उसमें सूजन आ जाती है। यह बीमारी एक या दोनों फेफड़ों में हो सकती है।निमोनिया होने पर फेफड़ों में मौजूद में हवा की थैली में मवाद भर जाता है।
इस वजह से मरीज को खांसने और सांस लेने में परेशानी होती है। सीने में दर्द भी हो सकता है। समय पर इस बीमारी का उपचार नहीं करने पर मरीज की मौत तक भी हो सकती है। आइए जानते हैं आखिर क्या होता है निमोनिया, इसके कारण, लक्षण, जांच और इलाज के बारे में।

यहां जानिए Pneumonia क्या है ?
Pneumonia: निमोनिया फेफड़ों में होने वाला संक्रमण है। इसके मुख्य कारण हैं जीवाणु या विषाणु संक्रमण। हालांकि, यह बैक्टीरिया, वायरस और पैरासाइट्स के कारण भी हो सकता है।इसके अलावा, निमोनिया सूक्ष्म जीव, कुछ खास तरह की दवाओं के सेवन और अन्य रोगों के संक्रमण के कारण भी हो सकता है। निमोनिया अधिकतर मामलों में छोटे बच्चों और बूढ़े लोगों में देखने को मिलता है। यह दूसरी उम्र के लोगों को भी प्रभावित कर सकता है।
Pneumonia के कारण
निमोनिया की मुख्य वजहों में वायरस, बैक्टीरिया और फंगस शामिल हैं। जब कोई संक्रमित व्यक्ति आपके सामने खांसता या छींकता है तो उस व्यक्ति के ड्रॉपलेट मुंह के जरिए आपके शरीर के अंदर चले जाते हैं। रेस्पिरेटरी वायरस जैसे कि इन्फ्लुएंजा या राइनोवायरस भी इस बीमारी का कारण बन सकते हैं।
इन सबके अलावा, मिट्टी और पक्षियों के मल से निकलने वाले कवक के कारण भी निमोनिया हो सकता है। न्यूमोनाइटिस जीरो वेसी और क्रिप्टोकोकस स्पिसीज आदि इसके उदाहरण हैं।
Pneumonia के लक्षण
- खांसी होना
- कमजोरी होना
- थकान महसूस करना
- खांसी के साथ बलगम का आना
- बुखार लगना
- बेचैनी महसूस करना
- भूख में कमी आना
- पसीना और कपकपी होना
- सांस लेने में कठिनाई होना
- सीने में दर्द होना
- सांस फूलने पर तेजी से सांस लेने की कोशिश करना
- अगर आप खुद में या अपने परिवार के किसी सदस्य में ऊपर दिए गए लक्षणों को देखते हैं तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें।
Pneumonia: इन घरेलू उपायों की भी ले सकते हैं मदद
निमोनियो होने पर सबसे पहले डॉक्टर से संपर्क करें, दवाएं एवं जांच करवाएं। डॉक्टर के बताएं परामर्श पर जरूर ध्यान दें।इसके साथ ही आप चाहें तो कुछ घरेलू इलाज भी कर सकते हैं। पुदीना, नीलगिरी और मेथी की चाय और नमकीन पानी के गरारे का उपयोग एक कप चाय या कॉफी पीते समय खांसी में सहायक होता है। गर्म और नम हवा को सांस की तकलीफ में आराम दे सकता है। दर्द और बुखार के लिए ओवर-द-काउंटर दवा के रूप में अच्छी तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है अदरक या हल्दी चाय सीने में दर्द के लिए शक्तिशाली एंटी- इंफ्लेमेटरी एजेंट के रूप में कार्य करता है।
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