सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। शुक्रवार को कारोबार शुरू होते ही घरेलू वायदा बाजार MCX में दोनों कीमती धातुओं पर दबाव नजर आया, जबकि इससे पहले अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई थी। बाजार में यह कमजोरी मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और अमेरिका से आए अपेक्षा से कमजोर जॉबलेस क्लेम आंकड़ों के चलते देखने को मिली।
इसके अलावा, ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नरम रुख ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। जब भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने-चांदी की मांग घट जाती है, जिसका असर सीधे कीमतों पर पड़ता है।
MCX पर सोना-चांदी के ताजा भाव
MCX पर चांदी की कीमत में जोरदार गिरावट देखी गई। यह 2,91,565 रुपये के स्तर से फिसलकर करीब 2,741 रुपये टूट गई और 2,88,824 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। वहीं, सोने की कीमत में भी नरमी रही और यह 372 रुपये गिरकर 1,42,743 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर पहुंच गया, जो पहले 1,43,115 रुपये था।
- MCX Gold (फरवरी वायदा): 0.26% की गिरावट के साथ 1,42,743 रुपये प्रति 10 ग्राम
- MCX Silver (मार्च वायदा): 0.94% टूटकर 2,88,824 रुपये प्रति किलोग्राम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कमजोरी
घरेलू बाजार की तरह वैश्विक स्तर पर भी सोने-चांदी के दाम दबाव में रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 0.29% गिरकर 4,602.43 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा, जबकि चांदी करीब 0.8% की गिरावट के साथ 91.69 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
कीमतों में गिरावट की प्रमुख वजहें
- डॉलर इंडेक्स में मजबूती: डॉलर इंडेक्स बढ़कर 99.49 के स्तर पर पहुंच गया, जो दिसंबर की शुरुआत के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
- भू-राजनीतिक तनाव में कमी: ट्रंप के बयान कि ईरान पर तुरंत कड़े टैरिफ नहीं लगाए जाएंगे और बातचीत के विकल्प खुले रहेंगे, इससे बाजार में तनाव कुछ हद तक कम हुआ।
- मुनाफावसूली का दबाव: हाल ही में चांदी 93.57 डॉलर के अपने अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंची थी, जिसके बाद निवेशकों ने मुनाफा वसूलना शुरू किया।
आगे क्या कहते हैं बाजार के जानकार?
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ से जुड़े फैसलों और फेडरल रिजर्व के संकेतों पर टिकी है। यदि महंगाई के आंकड़े नियंत्रित रहते हैं, तो फेड इस साल के अंत तक ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जिससे सोने-चांदी की कीमतों को दोबारा समर्थन मिल सकता है।









