बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के अस्थिकलश को लेकर हाल के दिनों में सामने आई विभिन्न चर्चाओं और अटकलों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि अस्थिकलश को कहीं भी स्थानांतरित नहीं किया जा रहा है। सरकार ने साफ किया है कि बाबा साहेब का अस्थिकलश अपने वर्तमान स्थान पर पूरी सुरक्षा के साथ सुरक्षित रखा गया है और इससे संबंधित स्थानांतरण की खबरें पूरी तरह निराधार एवं भ्रामक हैं।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार बाबा साहेब की स्मृतियों, विचारों और विरासत के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी उद्देश्य से लखनऊ के ऐशबाग स्थित भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र का चरणबद्ध तरीके से विकास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य बाबा साहेब से जुड़े स्थलों को सामाजिक चेतना, संवैधानिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित करना है।
अस्थिकलश को लेकर फैली अफवाहों पर सरकार ने लगाया विराम
पर्यटन मंत्री ने स्पष्ट किया कि संस्कृति विभाग अथवा उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अस्थिकलश के स्थानांतरण संबंधी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से प्रसारित अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास न करें। सरकार बाबा साहेब के सम्मान और उनकी विरासत से जुड़े प्रत्येक विषय पर पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है।
स्मारक परिसर के विकास का कार्य अंतिम चरण में
सरकार के अनुसार स्मारक परिसर के बाहरी विकास, फसाड और हॉर्टिकल्चर से जुड़े कार्य लगभग 16.20 करोड़ रुपये की लागत से कराए जा रहे हैं। परियोजना की भौतिक प्रगति करीब 85 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।
परिसर में बाउंड्री वॉल, स्टोन क्लैडिंग, तीन प्रवेश द्वार, गार्ड रूम, तोरण द्वार तथा प्रतिमा के पैडेस्टल का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। वहीं मुख्य प्रवेश द्वार का अधिकांश कार्य भी अंतिम चरण में है। इसके अलावा आंतरिक सड़कें, ड्रेनेज सिस्टम, म्यूरल वर्क और उद्यान विकास का कार्य निर्धारित समयसीमा के अनुसार तेजी से आगे बढ़ रहा है।
अत्याधुनिक ऑडिटोरियम और संग्रहालय भी होंगे आकर्षण
सरकार ने बताया कि लगभग 43.69 करोड़ रुपये की लागत से स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र के मुख्य निर्माण कार्य पहले ही पूरे किए जा चुके हैं। इसके अंतर्गत कार्यालय भवन, बेसमेंट, प्रतिमा के लिए फाउंडेशन, सब-स्टेशन, पंप रूम, गार्ड रूम, आंतरिक सड़क और अन्य आधारभूत सुविधाएं विकसित की गई हैं।
इसके अलावा करीब 44.43 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जा रहे 500 सीटों वाले अत्याधुनिक ऑडिटोरियम एवं प्रेक्षागृह का आंतरिक और बाहरी साज-सज्जा कार्य भी लगभग 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। यह परिसर भविष्य में सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सामाजिक कार्यक्रमों का प्रमुख केंद्र बनेगा।
संग्रहालय को मिला आधुनिक स्वरूप
डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक के संग्रहालय के आंतरिक विकास का कार्य भी पूरी तरह पूरा हो चुका है। लगभग 3.24 करोड़ रुपये की लागत से संग्रहालय को आधुनिक तकनीक और आकर्षक प्रस्तुति के साथ विकसित किया गया है। सरकार ने पूरी परियोजना को 31 जुलाई 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
बाबा साहेब की विरासत के संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों के सबसे बड़े प्रतीकों में से एक हैं। उनके सम्मान और स्मृतियों से जुड़े प्रत्येक विषय पर सरकार पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र के विकसित होने के बाद यह परिसर बाबा साहेब के विचारों के प्रचार-प्रसार, सामाजिक जागरूकता और नई पीढ़ी को संवैधानिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। साथ ही उन्होंने नागरिकों से अपील की कि अस्थिकलश को लेकर फैलाई जा रही किसी भी भ्रामक जानकारी पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें।









