उत्तर प्रदेश अब रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में देश के सबसे बड़े औद्योगिक केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। वर्ष 2018 में स्थापित उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) तेजी से आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने के साथ राज्य की एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को भी गति दे रहा है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा विकसित इस महत्वाकांक्षी परियोजना में अब तक ₹39,571 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जबकि कई इकाइयों में व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू हो गया है।
यूपीडा की ताजा प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, कानपुर, झांसी, लखनऊ, अलीगढ़, आगरा और चित्रकूट को मिलाकर विकसित किए जा रहे छह रणनीतिक नोड्स में रक्षा उद्योग तेजी से आकार ले रहा है। परियोजना के लिए अधिग्रहित 2,095 हेक्टेयर भूमि में से 1,141.79 हेक्टेयर भूमि विभिन्न कंपनियों को आवंटित की जा चुकी है, जिससे निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।
65 कंपनियां कर रहीं निवेश, हजारों रोजगार के अवसर
यूपीडीआईसी के मुख्य महाप्रबंधक कर्नल संजय सिंह के अनुसार, अब तक 65 कंपनियों को रक्षा एवं संबद्ध विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए भूमि आवंटित की जा चुकी है। इनमें से करीब ₹13,486 करोड़ की परियोजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं।
इन परियोजनाओं से लगभग 15,300 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इससे न केवल प्रदेश के युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर खुलेंगे, बल्कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की भूमिका भी और मजबूत होगी।
कानपुर बना सबसे बड़ा निवेश केंद्र
डिफेंस कॉरिडोर के छह नोड्स में कानपुर निवेश आकर्षित करने में सबसे आगे है। यहां ₹12,948 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इसके बाद झांसी (₹12,190 करोड़), लखनऊ (₹4,850.67 करोड़), अलीगढ़ (₹4,581 करोड़), चित्रकूट (₹4,392 करोड़) और आगरा (₹607 करोड़) का स्थान है।
औद्योगिक गतिविधियों की दृष्टि से भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्तमान में कानपुर, लखनऊ और अलीगढ़ में कुल नौ रक्षा विनिर्माण इकाइयों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है।
रक्षा उत्पादन में कई बड़ी कंपनियों ने शुरू किया निर्माण
कानपुर नोड में अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने लगभग ₹1,500 करोड़ के निवेश से देश के सबसे बड़े गोला-बारूद निर्माण संयंत्र में उत्पादन शुरू कर दिया है। यह परियोजना भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को नई मजबूती देने वाली मानी जा रही है।
अलीगढ़ में वेरीविन डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड छोटे हथियारों का निर्माण कर रही है, जबकि नित्या क्रिएशन्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड प्रिसिजन आर्म्स कंपोनेंट्स का उत्पादन कर रही है। वहीं श्रीधा उद्योग ने भी रक्षा क्षेत्र के लिए प्रिसिजन कंपोनेंट्स का निर्माण शुरू कर दिया है। इसके अलावा एमिटेक (AMITECH) ने अपने स्पेस पोर्ट स्टेशन के संचालन के साथ प्रदेश के डिफेंस इकोसिस्टम को नई दिशा दी है।
लखनऊ बन रहा एयरोस्पेस और हाई-टेक डिफेंस हब
राजधानी लखनऊ उन्नत रक्षा तकनीक और एयरोस्पेस विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां एरोलॉय टेक्नोलॉजीज ने टाइटेनियम कास्टिंग का उत्पादन शुरू किया है, जबकि ब्रह्मोस एयरोस्पेस की इकाई में ब्रह्मोस-एनजी मिसाइल प्रणाली के उत्पादन और असेंबली का कार्य शुरू हो चुका है।
इसके अलावा संकल्प सेफ्टी सॉल्यूशंस विशेष सुरक्षा उपकरण और रक्षा उपयोगी वस्त्रों का निर्माण कर रही है। वहीं कानपुर स्थित अन्य उद्योग बैलिस्टिक सामग्री, विशेष टेक्सटाइल और सुरक्षा उपकरणों के उत्पादन में जुटे हैं।
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी नई मजबूती
डिफेंस कॉरिडोर में तेज गति से हो रहा निवेश, मजबूत औद्योगिक आधारभूत संरचना और उत्पादन शुरू होने से उत्तर प्रदेश देश के रक्षा विनिर्माण मानचित्र पर अग्रणी भूमिका निभाने की ओर बढ़ रहा है। यह परियोजना केवल रक्षा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश, तकनीकी विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास के नए अवसर भी पैदा कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर देश के सामरिक और एयरोस्पेस उद्योग का प्रमुख केंद्र बन सकता है, जिससे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को भी नई मजबूती मिलेगी।









