‘प्रयास असफल हो सकता है, पर प्रार्थना नहीं’, DK शिवकुमार की पोस्ट ने कर्नाटक की राजनीति में बढ़ाई हलचल

0
0
‘प्रयास असफल हो सकता है, पर प्रार्थना नहीं’, DK शिवकुमार की पोस्ट ने कर्नाटक की राजनीति में बढ़ाई हलचल
‘प्रयास असफल हो सकता है, पर प्रार्थना नहीं’, DK शिवकुमार की पोस्ट ने कर्नाटक की राजनीति में बढ़ाई हलचल

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान एक बार फिर सुर्खियों में है। इसी बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से हुई संक्षिप्त मुलाकात के बाद राज्य की राजनीति में अटकलें और तेज हो गई हैं। इस राजनीतिक माहौल के बीच डीके शिवकुमार का सोशल मीडिया पोस्ट खासा चर्चा में आ गया है।

डीके शिवकुमार का संदेश क्या संकेत देता है?

उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “प्रयास भले ही विफल हो जाए, लेकिन प्रार्थना कभी विफल नहीं होती।” उनके इस संदेश को राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यह पोस्ट मौजूदा सियासी हालात से जुड़ा एक सूक्ष्म संदेश हो सकता है। गौरतलब है कि डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर खुले तौर पर अपनी महत्वाकांक्षा जता चुके हैं, जबकि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया लगातार कहते रहे हैं कि इस पर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा।

राहुल गांधी से हुई अहम मुलाकात

पिछले महीने डीके शिवकुमार की राहुल गांधी से मिलने की कोशिशें सफल नहीं हो पाई थीं। हालांकि मंगलवार को तमिलनाडु से दिल्ली लौटते समय राहुल गांधी ने मैसुरु एयरपोर्ट पर टारमेक पर ही पहले डीके शिवकुमार और उसके बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से अलग-अलग मुलाकात की। ये मुलाकातें संक्षिप्त जरूर रहीं, लेकिन राजनीतिक तौर पर काफी अहम मानी जा रही हैं।

पोस्ट के सियासी मायने

डीके शिवकुमार के ताजा ट्वीट को लेकर यह कयास लगाए जा रहे हैं कि राहुल गांधी ने उन्हें फिलहाल इंतजार करने का संदेश दिया है। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मसले पर विस्तृत बातचीत के लिए दोनों नेताओं को जल्द दिल्ली बुलाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

सिद्धारमैया ने किया बदलाव की चर्चाओं से इनकार

इससे पहले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सरकार में बदलाव को लेकर चल रही अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि पार्टी आलाकमान जो भी निर्णय लेगा, वह उसे स्वीकार करेंगे। हालांकि, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच लंबे समय से चल रही खींचतान और संभावित फेरबदल की चर्चाओं के बीच राहुल गांधी से दोनों नेताओं की मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है।