BBC: आलोचना को बंद नहीं किया जा सकता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की हर कीमत पर रक्षा की जानी चाहिए। यह बातें ब्रिटिश संसद में कही गयी है। दरअसल, बीबीसी के कार्यालयों पर पिछले सप्ताह आयकर विभाग ने छापा मारा था। बुधवार को इस मुद्दे पर हाउस ऑफ कॉमन्स के सदस्यों ने ब्रिटिश सरकार से सवाल किया कि इस मामले में ब्रिटिश सरकार ने क्या किया? मंगलवार की दोपहर, केवल 20 मिनट के लिए, ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (FCDO) के संसदीय अवर सचिव, टोरी एमपी डेविड रटली ने छापे के संबंध में विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्यों के साथ सदन में बहस की। सभी ने एक स्वर में कहा, “हम बीबीसी के लिए खड़े हैं, हम बीबीसी को फंड देते हैं, हमें लगता है कि बीबीसी वर्ल्ड सर्विस बेहद महत्वपूर्ण है।” रटली ने कहा, यूके सरकार चाहती थी कि बीबीसी को संपादकीय स्वतंत्रता मिले।
‘अर्जेंट क्वेश्चन’ के माध्यम से सरकार से सांसदों नें पूछे सवाल
बता दें कि मंगलवार को ब्रिटिश सांसदों ने निचले सदन हाउस ऑफ़ कॉमन्स के नियमित कामकाज के दौरान ‘अर्जेंट क्वेश्चन’ के माध्यम से सरकार से पूछा कि विदेश मंत्री इस कार्रवाई पर किसी तरह का बयान जारी क्यों नहीं करते? इससे पहले ब्रिटिश लेबर पार्टी के नेता फ़ैबियन हेमिल्टन ने भारत सरकार की इस कार्रवाई पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, ”जहां सही मायनों में प्रेस अपना काम करने के लिए स्वतंत्र हो, ऐसे लोकतांत्रिक देश में बिना वजह आलोचनात्मक आवाज़ों को नहीं दबाया जा सकता है। अभिव्यक्ति की आज़ादी की हर क़ीमत पर रक्षा होनी चाहिए।”

BBC का बयान
बता दें कि छापेमारी खत्म होने के बाद BBC के एक अधिकारी ने अपने बयान में कहा,”आयकर विभाग के अधिकारी हमारे दिल्ली और मुंबई के दफ्तरों से जा चुके हैं। हम IT की टीम का सहयोग करते रहेंगे। उम्मीद है कि मामला जल्दी ही सुलझ जाएगा। हम अपने कर्मचारियों का पूरी तरह से समर्थन कर रहे हैं। उनका ध्यान भी रख रहे हैं। खासतौर पर उन लोगों ने जिनसे बहुत लंबी पूछताछ की गई है। हम अपने रीडर्स, लिसनर्स और दर्शकों को निष्पक्ष समाचार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम भरोसेमंद, निष्पक्ष, अंतरराष्ट्रीय और स्वतंत्र मीडिया हैं’।
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