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केन्द्र सरकार Google जैसी टेक कंपनियों को लेकर हुई एक्टिव, मीडिया संस्थानों के कंटेंट्स शेयर करने पर करना होगा भुगतान

Google और फेसबूक के द्वारा मीडिया के कंटेट्स को इस्तेमाल करने से कंपनियों को बहुत मुनाफा होता लेकिन, मीडिया हाउस को इसके बदले कुछ भी भुगतान नहीं किया जाता है। इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पूरी तरह से एक्टिव मोड में आ गई है।

Google जैसी टेक कंपनियों और मीडिया हाउस के बीच रेवेन्यू को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है क्योंकि डिजिटल मीडिया और न्यूज पब्लिशर्स का कहना है कि गूगल (Google) और फेसबुक (Facebook) जैसी बड़ी कंपनियां उनके कंटेंट्स का इस्तेमाल करती हैं। गूगल और फेसबुक के द्वारा मीडिया के कंटेंट्स को इस्तेमाल करने से कंपनियों को बहुत बड़ा मुनाफा होता है लेकिन, मीडिया हाउस को इसके बदले कुछ भी भुगतान नहीं किया जाता है।

इस मामले को लेकर केन्द्र सरकार पूरी तरह से एक्टिव मोड में आ गई है। केन्द्र सरकार मीडिया हाउस के कंटेंट्स का इस्तेमाल करने पर IT कानून लागू करने की योजना बना रही है। वहीं, इस तरह का कानून ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और फ्रांस में पहले से लागू है।

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केन्द्र सरकार Google जैसी टेक कंपनियों को लेकर हुई एक्टिव

Google टेक कंपनियों से बचाने के लिए IT कानून लाने की तैयारी

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने एक टीवी चैनल के साक्षात्कार में बताया कि सरकार ने मीडिया कंपनियों को टेक कंपनियों से बचाने के लिए IT कानून लाने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। यह कानून तय करेगा जिससे भारतीय मीडिया को Google और Facebook जैसी टेक कंपनियों से कोई भी नुकसान न हो।

उन्होंने आगे कहा कि केन्द्र सरकार की योजना है कि बड़ी कंपनियों से मीडिया हाउस और पब्लिशर्स को रेवेन्यू भी मिले। हालांकि, दुनिया भर के मीडिया हाउस को रेवेन्यू दिलाना कोई आसान काम नहीं है। ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस से लेकर भारत तक Google और Facebook जैसी कंपनियों को बातचीत के मुद्दे पर लाना थोड़ा मुश्किल है।

Google टेक कंपनियों से बचाने के लिए IT कानून लाने की तैयारी

पवन दुग्गल ने कहा- भारतीय मीडिया कंटेंट्स की ताकत समझ गई सरकार

वहीं, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता पवन दुग्गल ने कहा कि टेक कंपनियों को यह समझने की जरूरत है कि मुफ्त में कुछ भी नहीं मिलता है। उन्होंने आगे कहा कि आखिरकार केन्द्र सरकार भारतीय डेटा की ताकत पहचान गई है इसलिए भारतीय डेटा से होने वाला लाभ सिर्फ विदेशियों को ही नहीं बल्कि भारतीयों को भी इसका फायदा होना चाहिए।

वकील ने आगे कहा कि भारतीय कंपनियां दशकों से सोशल मीडिया और टेक कंपनियों की दया पर आश्रित बनी हुई हैं। लेकिन, अब समय आ गया है कि देश में ऐसा कानून बनाए जाएं जो न केवल सुरक्षित हों बल्कि मुआवजे के रास्ते भी खोले दें। इस पूरे विवाद की जड़ मीडिया हाउस और Microsoft, Google, Facebook, Instagram और WhatsApp जैसी बड़ी टेक कंपनियों के बीच रेवेन्यू के बंटवारे को लेकर है।

Government Taxes imposed on Facebook and WhatsAPP,  Fill up so many rupees
डिजिटल मीडिया कंटेंट्स से Google को होता है मुनाफा

डिजिटल मीडिया कंटेंट्स से Google को होता है मुनाफा

भारत के डिजिटल मीडिया और समाचार पत्र पब्लिशर्स अपने ओरिजिनल कंटेंट्स के लिए रेवेन्यू का एक हिस्सा चाहते हैं। बता दें कि जब कोई यूजर गूगल पर कुछ भी सर्च करता है तो गूगल उस विषय से रिलेटड सीधे पब्लिशर की वेबसाइट तक ले जाता है। इस सर्चिंग से गूगल अपना मुनाफा कमाता है हालांकि, कंटेंट्स उपलब्ध कराने वाले को कुछ भी नहीं मिलता है जिसकी वजह से कंटेंट्स प्रोवाइडर इसे गलत मानते हैं।

वहीं, विज्ञापन के बदले मिलने वाला रेवेन्यू आसमान छू रहा है। टेक कंपनियां लगातार अपना मुनाफा बढ़ा रही हैं और डिजिटल मीडिया और न्यूज पेपर पब्लिशर्स का मानना है कि टेक कंपनियों की इस ग्रोथ में उनके कंटेंट्स का अहम रोल है।

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IT कानून बनाने वाला पहला देश बना ऑस्ट्रेलिया

IT कानून बनाने वाला पहला देश बना ऑस्ट्रेलिया

जानकारी के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया ने कुछ समय पहले ही एक नया कानून पास किया है। इस कानून के मुताबिक फेसबुक और गूगल (Google) जैसी टेक कंपनियों को सर्च रिजल्ट में स्थानीय मीडिया हाउस का कंटेंट लिंक या न्यूज फीड में दिखाने पर उन्हें भुगतान करना होगा। ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश है जहां टेक कंपनियों और पब्लिशर्स के बीच अगर कोई डील नहीं हो पाती है तो सरकार का नियुक्त किया गया मध्यस्थ हस्तक्षेप करता है। ऐसे केस में कोई मध्यस्थ तय करता है कि टेक कंपनी ऑस्ट्रेलियन न्यूज पब्लिशर को कितना राशि भुगतान करेगी।

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जर्मनी, फ्रांस और स्पेन में भी यह नियम लागू

जर्मनी, फ्रांस और स्पेन में भी यह नियम लागू

बता दें कि पिछले साल गूगल ने कई बड़े जर्मन और फ्रेंच प्रकाशकों के साथ कॉपीराइट डील करने का ऐलान किया था। इस दौरान गूगल ने कहा था कि वह हजारों दूसरे यूरोपीय पब्लिशर्स को लाइसेंस एंग्रीमेंट की पेशकश करने के लिए एक नया टूल लाने जा रहा है। वहीं, स्पेन ने पिछले साल ही यूरोपियन यूनियन (EU) के संशोधित कॉपीराइट नियमों को अपने कानून में शामिल किया है। जिसके बाद स्पेन के मीडिया आउटलेट्स सीधे गूगल से बातचीत करते हैं।

EU के देशों ने अपनाए ये नए नियम

यूरोपियन यूनियन के देशों ने पब्लिशर्स को उनके कंटेंट पर अतिरिक्त अधिकार देने के लिए 2019 के EU के निर्देशों को अपना लिया है। EU के नए कानून से एक तरफ गूगल जैसे सर्च इंजन्स को न्यूज कंटेंट्स के इस्तेमाल की मंजूरी मिलते ही पब्लिशर्स को कंटेंट्स के इस्तेमाल के लिए ऑनलाइन प्रिव्यू करने का ऑपशन भी दे दिया गया।

भारत में Google के खिलाफ जांच जारी

भारत में Google के खिलाफ जांच जारी

बता दें कि इंडियन न्यूजपेपर्स सोसाइटी (INS) भारत की एंटी ट्रस्ट एजेंसी ने गूगल के खिलाफ शिकायत दर्ज कर चुकी है। CCI को अपनी शिकायत में INS ने Alphabet इंक, गूगल एलएलसी, गूगल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, गूगल आयरलैंड लिमिटेड और गूगल एशिया पैसिफिक पीटीई लिमिटेड के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। वहीं, केप्लेंट में कहा गया है कि ये कंपनियां भारतीय ऑनलाइन समाचार मीडिया में न्यूज रेफरल सेवाओं और गूगल एड से संबंधित अपनी सेवाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं जिसमें धारा 4 का उल्लंघन किया जा रहा है।

वहीं, आईएनएस ने अपनी शिकायत में आगे कहा कि गूगल जैसे सर्च इंजन पब्लिशर्स के कंटेंट्स से अधिक रकम में मुनाफा कमाते हैं और इसके बदले कंटेंट प्रोवाइडर को कुछ खास भुगतान करते हैं। इन आरोप के बाद गूगल के खिलाफ जांच के आदेश जारी हो चुके हैं।

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