Maharashtra Crisis: महाराष्ट्र की राजनीति में उठापटक का दौर जारी है।खासतौर से एनसीपी नेता अजित पवार की ओर से रविवार को पार्टी के खिलाफ बगावत के बाद हालात और नाजुक हो गए हैं।ताजा घटनाक्रम में अजित पवार ने एकनाथ शिंदे सरकार में बतौर डिप्टी सीएम के तौर पर शपथ ली। इस दौरान उनके साथ कई अन्य नेता भी शामिल थे। अचानक से जिस प्रकार एनसीपी में राजनीतिक उठापटक हुई है।
इस बात का अंदाजा पार्टी चीफ शरद पवार को पहले ही हो चुका था। शायद इसीलिए उन्होंने अजित पवार को साइडलाइन करते हुए अपनी बेटी सुप्रिया सुले को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था। उन्होंने सीधेतौर पर कहा था कि अजित पवार के पास पहले से ही नेता विपक्ष की जिम्मेदारी है। ऐसे में उन्हें अपने दायित्व पूरे करने हैं।

Maharashtra Crisis:भतीजे के इरादों को भांप चुके थे शरद पवार
Maharashtra Crisis: पार्टी में किए गए बदलाव के पीछे बड़ी वजह शरद पवार का हवा का रूख को पहचानना था। उन्हें अजित पवार के इरादों की भनक लग चुकी थी। मालूम हो कि साल 2019 में भी अजित पवार ने बगावत की थी।उस दौरान शरद पवार ने बदलाव किया।उन्हें तभी इस बात का अंदाजा लग गया था कि बढ़ती उम्र के साथ अगर फिर से ऐसा कुछ होता है तो वह गेम बदलने में कामयाब नहीं हो पाएंगे। लिहाजा उन्होंने कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर सुप्रिया सुले की ताजपोश कर डाली।
संबंधित खबरें
- Maharashtra Political Crisis: सब्जियां बेचने से लेकर महाराष्ट्र की सियासत में अहम जिम्मेदारी निभा चुके हैं Chhagan Bhujbal, जानिए इनके राजनीतिक जीवन से जुड़ी खास बातें
- Maharashtra Politics: जानिए आखिर क्यों चाचा शरद पवार को छोड़, शिंंदे सरकार में शामिल हुए अजित पवार ?