उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास को नई रफ्तार देते हुए मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने घोषणा की है कि एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद शुरुआती 15 दिनों तक इस पर यात्रा पूरी तरह टोल-फ्री रहेगी। इस निर्णय का उद्देश्य आम जनता को इस अत्याधुनिक परियोजना का अनुभव कराना और इसे व्यापक रूप से उपयोग में लाना है।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने तत्काल कार्रवाई करते हुए परियोजना से जुड़े कंसेशनायर—आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर और अदाणी इंफ्रास्ट्रक्चर—को 15 दिनों तक टोल वसूली स्थगित रखने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इस अवधि में यात्रियों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।
सीओडी के साथ लागू हुआ फैसला
यह निर्णय एक्सप्रेसवे की कमर्शियल ऑपरेशन डेट (COD) घोषित होने के साथ ही प्रभावी हो गया है। स्वतंत्र इंजीनियर द्वारा कंसेशन एग्रीमेंट के तहत प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी होने के बाद यह परियोजना आम जनता के उपयोग के लिए तैयार मानी गई है।
सरकार का मानना है कि इस शुरुआती टोल-फ्री अवधि से अधिक से अधिक लोग एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता, सुविधाओं और तेज कनेक्टिविटी का अनुभव कर सकेंगे।
‘फ्री राइड एक्सपीरियंस’ से बढ़ेगा भरोसा
करीब 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा और आधुनिक एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट है। मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह मार्ग राज्य के 12 जिलों को जोड़ता है।
सरकार का लक्ष्य है कि शुरुआती दिनों में बिना शुल्क यात्रा की सुविधा देकर लोगों को इस परियोजना से सीधे जोड़ने का अवसर दिया जाए। इससे न केवल एक्सप्रेसवे के प्रति जनता का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
PPP मॉडल पर विकसित मेगा प्रोजेक्ट
गंगा एक्सप्रेसवे को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया गया है। इसे DBFOT (टोल) प्रणाली के अंतर्गत बनाया गया है, जिसमें कंसेशनायर को 27 वर्षों तक टोल वसूली का अधिकार दिया गया है।
हालांकि, 15 दिनों की इस टोल छूट से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई राज्य सरकार या यूपीडा द्वारा अनुबंध की शर्तों के अनुसार की जाएगी।
मेंटेनेंस और सुरक्षा पर सख्त निगरानी
यूपीडा ने स्पष्ट किया है कि टोल-फ्री अवधि के दौरान भी सड़क की गुणवत्ता, सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। कंसेशन एग्रीमेंट के तहत ऑपरेशन और मेंटेनेंस से जुड़े सभी मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा।
इसमें सड़क की नियमित निगरानी, आपातकालीन सेवाएं, ट्रैफिक कंट्रोल और यात्रियों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेमचेंजर’
गंगा एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए एक ‘गेमचेंजर’ परियोजना माना जा रहा है। यह एक्सप्रेसवे न केवल लंबी दूरी की यात्रा को तेज और सुगम बनाएगा, बल्कि औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल राज्य को लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।









