उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा और कृषि क्षेत्र को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर जोर देते हुए कहा कि युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सिक्योरिटी, स्पेस साइंस और अन्य अत्याधुनिक तकनीकों में दक्ष बनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों और तकनीकी क्रांति के दौर में वही समाज आगे बढ़ेगा जो अपने युवाओं को आधुनिक ज्ञान और कौशल से लैस करेगा।
रविवार को गुरु गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित सभागार में आयोजित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की साधारण बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षा परिषद से जुड़ी संस्थाओं के प्रमुखों, शिक्षकों और कर्मचारियों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप कार्य करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान और आने वाले समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में लगातार सुधार और नवाचार जरूरी हैं।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि ‘दिग्विजय नाथ एल.टी. प्रशिक्षण महाविद्यालय’ का नाम बदलकर अब ‘दिग्विजय नाथ कॉलेज ऑफ टीचर्स एजुकेशन’ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संस्थानों को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें रोजगारोन्मुखी और तकनीक आधारित शिक्षण को बढ़ावा देना होगा।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए तकनीकी प्रशिक्षण को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से युवाओं को AI, साइबर सिक्योरिटी और स्पेस साइंस जैसे विषयों में प्रशिक्षित करने का निर्देश दिया। उनका कहना था कि युवाओं को ऐसा कौशल दिया जाए जिससे वे रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार सृजित करने की क्षमता विकसित कर सकें।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन और रोजगार के लिए तैयार करना होना चाहिए। उन्होंने संस्थानों से ऐसे पाठ्यक्रम विकसित करने का आग्रह किया जो उद्योगों और आधुनिक कार्यक्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप हों।
कृषि क्षेत्र पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती से जोड़ना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों को किसानों के प्रशिक्षण और जागरूकता का प्रमुख माध्यम बताते हुए कहा कि इनके जरिए किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, नई फसलों और आधुनिक संसाधनों की जानकारी दी जानी चाहिए। इससे किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शिक्षा संस्थानों को समाज की जरूरतों से जोड़ना समय की मांग है। संस्थानों की गतिविधियां स्थानीय जनता, युवाओं और किसानों के विकास में योगदान दें, तभी उनका वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा। उन्होंने संस्थाध्यक्षों से नवाचार, अनुशासन और समयबद्ध कार्य संस्कृति अपनाने का आह्वान किया।
बैठक में मुख्यमंत्री ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के आगामी शताब्दी वर्ष 2032 की तैयारियां अभी से शुरू करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि परिषद ने नौ दशकों से अधिक समय तक शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और शताब्दी वर्ष को ऐतिहासिक एवं भव्य स्वरूप में मनाया जाना चाहिए। इसके लिए सभी संस्थाओं को विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध तरीके से काम शुरू करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री के संबोधन में स्पष्ट संदेश था कि आधुनिक शिक्षा, तकनीकी कौशल और वैज्ञानिक कृषि ही भविष्य के विकसित भारत की मजबूत नींव साबित होंगे। युवाओं और किसानों को सशक्त बनाकर ही प्रदेश और देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।









