महंगाई पर अखिलेश का वार, पेट्रोल-डीजल के बढ़े दामों और मंत्रालय बंटवारे में देरी पर सरकार को घेरा

0
0

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़े असर के बीच देशभर में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तेल कंपनियों द्वारा पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब तीन-तीन रुपये प्रति लीटर तक इजाफा किए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महंगाई और उत्तर प्रदेश में मंत्रालयों के बंटवारे में हो रही देरी को लेकर भाजपा सरकार पर तंज कसा है।

लखनऊ में पेट्रोल की कीमत में 2.84 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3.01 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। नई दरों के बाद राजधानी में पेट्रोल 97.55 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.82 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं सीएनजी की कीमतों में भी दो रुपये प्रति किलो तक का इजाफा किया गया है। ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर आम लोगों की जेब पर पड़ता दिखाई दे रहा है।

इसी मुद्दे पर अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सरकार को निशाने पर लेते हुए लिखा कि “आगे बढ़ना है तो साइकिल ही विकल्प है।” उनके इस बयान को बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल के दामों पर कटाक्ष के तौर पर देखा जा रहा है।

सिर्फ महंगाई ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब तक मंत्रालयों के आवंटन में हो रही देरी पर भी सपा प्रमुख ने सरकार को घेरा। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मंत्रालयों के बंटवारे में देरी की वजह सत्ता के भीतर “कमीशन और कमाई” के बंटवारे को लेकर चल रही खींचतान है।

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि नए मंत्री फिलहाल “दर्शक दीर्घा” में बैठे हुए हैं और विभागों के आवंटन का इंतजार कर रहे हैं। अखिलेश ने भाजपा के “डबल इंजन” मॉडल पर भी तंज कसते हुए कहा कि यह व्यवस्था बाकी मंत्रियों को “डब्बा” कर देती है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महंगाई और सरकार के अंदरूनी फैसलों को लेकर विपक्ष लगातार भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। वहीं सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।