भूमि अधिग्रहण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (21 फरवरी) को एक अहम आदेश दिया। 3 जजों की एक बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के ही एक फैसले पर फिलहाल अमल ना किए जाने का निर्देश दिया है। बेंच ने कहा कि इस मामले को बड़ी बेंच के पास भेजने पर विचार किया जाएगा।

जस्टिस मदन बी लोकुर, कुरियन जोसफ और दीपक गुप्ता की बेंच ने जिस फैसले पर अमल ना करने का निर्देश देश भर की अदालतों को दिया है, उसे भी 3 जजों की बेंच ने ही पास किया था। 8 फरवरी को आए इस फैसले में जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि अगर सरकार ज़मीन का तय मुआवजा देने की कोशिश करती है, लेकिन ज़मीन का मालिक मुआवजा नहीं लेता तो इस आधार पर अधिग्रहण रद्द नहीं होगा।

इस फैसले के ज़रिए 2014 में आया एक और फैसला पलट दिया गया था। 2014 के फैसले में कहा गया था कि जब तक ज़मीन मालिक को पैसे नहीं मिलते या पैसे कोर्ट में जमा नहीं होते तब तक ये माना जाएगा कि भुगतान नहीं हुआ। इस आधार पर अधिग्रहण निरस्त हो सकता है।

8 फरवरी को आए फैसले से ये अंदेशा बढ़ गया था कि देश भर में निपटाए जा चुके भूमि अधिग्रहण के सैंकड़ों मुकदमे दोबारा खुल जाएंगे। साथ ही, इससे किसानों के हितों को भी नुकसान पहुंचने का अंदेशा था।

भूमि अधिग्रहण से जुड़ी कुछ और याचिकाओं पर सुनवाई करने बैठे जस्टिस मदन बी लोकुर, कुरियन जोसफ और दीपक गुप्ता की बेंच के सामने बुधवार को कई वकीलों ने 8 फरवरी के आदेश पर सवाल उठाए। बेंच ने उनकी चिंता से सहमति जताते हुए कहा कि वो पूरे मामले को 5 जजों की बेंच के पास भेजने पर विचार करेगी। मामले में अगली सुनवाई 7 मार्च को होगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here