कौन हैं चुनाव आयुक्त Arun Goel, जिनकी नियुक्ति को लेकर मचा है बवाल?

अरुण गोयल 1985 बैच के पंजाब कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। उन्हें 31 दिसंबर को 60 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होना था, लेकिन उन्होंने पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली।

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Arun Goel
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Arun Goel: पूर्व नौकरशाह और पंजाब कैडर के IAS अधिकारी अरुण गोयल ने हाल ही में चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला है। अब उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर चर्चा का माहौल गर्म है। दरअसल, पद छह माह से खाली था। गोयल मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार और चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडे के साथ अभी काम कर रहे हैं। पूर्व सीईसी सुशील चंद्रा और राजीव कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद से को पदभार सौंपने के बाद से यह पद खाली था। तब से, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अयोग्य घोषित करने की मांगों जैसे गंभीर मुद्दे सामने आए जिससे चुनाव आयोग दबाव में आ गया था।

Arun Goel की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर बवाल

अब गोयल की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। जिसपर पांच सदस्यीय संविधान पीठ सुनवाई कर रही है। पीठ ने मंगलवार को निर्वाचन आयुक्तों (ईसी) और मुख्य निर्वाचन आयुक्तों (सीईसी) के रूप में अपनी पसंद के सेवारत नौकरशाहों को नियुक्त करने की केंद्र की वर्तमान प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी श्रेष्ठ गैर-राजनीतिक सुदृढ़ चरित्र वाले व्यक्ति को नियुक्त करने के लिए एक ‘निष्पक्ष और पारदर्शी तंत्र’ अपनाया जाना चाहिए। आप हमें गोयल की नियुक्ति की फाइलें जल्द दिखाएं। जस्टिस केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ, जिसमें जस्टिस अजय रस्तोगी, जस्टिस अनिरुद्ध बोस, जस्टिस ऋषिकेश रॉय और जस्टिस सीटी रविकुमार शामिल हैं।

चुनाव आयुक्त Arun Goel की नियुक्ति पर SC सख्त
चुनाव आयुक्त Arun Goel की नियुक्ति पर SC सख्त

कौन हैं नए चुनाव आयुक्त अरुण गोयल?

अरुण गोयल 1985 बैच के पंजाब कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। उन्हें 31 दिसंबर को 60 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होना था, लेकिन उन्होंने पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। वह सेवानिवृत होने तक उद्योग सचिव के रूप में कार्यरत थे। इससे पहले, उन्होंने केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय में कार्य किया। गोयल की नियुक्ति गुजरात में चुनाव से कुछ दिन पहले हुई है। अरुण गोयल मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) बनने की कतार में भी हैं।

गोयल के कार्यभार संभालने के साथ, कर्नाटक, तेलंगाना और पूर्वोत्तर राज्यों नागालैंड, मेघालय, त्रिपुरा और कर्नाटक सहित अगले साल के चुनावों के लिए कार्यक्रम तय करते वक्त अब अपनी पूरी ताकत होगी।

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